
चम्बा: हिमाचल प्रदेश में इस बार कुदरत का ऐसा कहर बरपा है, जिसने जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। कुदरत के कहर का असर उत्तरी भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा भी पड़ा है। प्रशासन द्वारा यात्रा पर पूरी तरह से राेक लगा दी गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि हालात को देखते हुए यात्रा पूरी तरह बंद रहेगी। जिन श्रद्धालुओं ने यात्रा शुरू कर दी थी, उन्हें वहीं से वापस भेजा जा रहा है और चम्बा से आगे किसी को जाने की अनुमति नहीं दी जा रही।
इस बार स्थिति इतनी गंभीर है कि परंपरा के प्रतीक पवित्र छड़ियों को भी मणिमहेश की डल झील तक नहीं ले जाया गया। प्रशासन का कहना है कि लगातार भारी बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन हुआ है और कई रास्ते बंद पड़े हैं, ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। यही वजह है कि अधिकारियों ने यात्रा काे राेकने का फैसला लिया है।
चम्बा के उपायुक्त मुकेश रेप्सवाल ने पुष्टि की कि इस वर्ष मणिमहेश यात्रा पूरी तरह रोक दी गई है। उन्होंने बताया कि मौसम में सुधार के कोई संकेत नहीं हैं और लगातार बारिश ने हालात को और मुश्किल बना दिया है।
मणिमहेश यात्रा में हर साल हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस यात्रा का सबसे अहम अवसर “बड़ा स्नान” माना जाता है, जो इस बार 31 अगस्त को होना था। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु डल झील में पवित्र स्नान करते हैं, लेकिन इस साल खराब मौसम और प्रशासनिक पाबंदी के कारण यह परंपरा पूरी नहीं हो सकेगी।
स्थानीय लोग और श्रद्धालु निराश जरूर हैं, लेकिन ज्यादातर लोग मान रहे हैं कि प्रशासन ने यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। पहाड़ों में लगातार बारिश और बंद रास्तों को देखते हुए यह कदम मजबूरी में उठाना पड़ा है।








