हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के अखाड़ा बाजार में प्रकृति के कहर ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं हैं। बुधवार और गुरुवार को हुई भूस्खलन की 2 घटनाओं ने 12 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया, जिनमें से अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। रात होने के कारण बचाव कार्य फिलहाल रोक दिया गया है, लेकिन एक लापता व्यक्ति के लिए उम्मीदें और प्रार्थनाएं अभी भी जारी हैं।
यह त्रासदी बुधवार (3 सितम्बर) को शुरू हुई, जब एक भूस्खलन ने 3 लोगों को मलबे में दफन कर दिया। हालांकि, एक व्यक्ति चमत्कारिक रूप से खुद बाहर निकलने में कामयाब रहा। बचाव दलों ने अथक प्रयास के बाद 2 शव बरामद किए, जिनकी पहचान एनडीआरएफ के जवान नरेंद्र निवासी कुल्लू और कश्मीर के कुपवाड़ा निवासी बकार अहमद मीर के रूप में हुई। बता दें कि एनडीआरएफ के जवान नरेंद्र का शव एक बड़ी चट्टान के नीचे दबा हुआ था, जिसे खाेजी कुत्ताें ने ढूंढा और इसके बाद शव काे कड़ी मशक्कत के बाद उस चट्टान के नीचे से निकाला गया।
अभी कुल्लू इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि अगले ही दिन गुरुवार (4 सितम्बर) को उसी अखाड़ा बाजार में एक और बड़ा भूस्खलन हुआ। इस बार 10 लोग मलबे के नीचे दब गए। इस घटना में कुल्लू निवासी 3 लोगों राधिका, कमलेश, और अभिनव सांख्यान को सुरक्षित बचा लिया गया। बचाव अभियान के दौरान जैसे-जैसे मलबा हटाया गया, वैसे-वैसे दिल दहला देने वाले मंजर सामने आते गए।
इस हादसे ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि रोजी-रोटी के लिए कश्मीर से आए कई लोगों को भी अपना शिकार बनाया। अब तक मलबे से कुल्लू की रहने वाली लता देवी, कश्मीर के रहने वाले अब्दुल रशीद, सजाद अहमद वाणी, मेहराजद्दीन लोन, हुसैन लोन और ताहिर दीन अहमद शेख के शव निकाल लिए गए हैं, जबकि कश्मीर का ही रहने वाला गुलजार अब भी लापता है और उसके परिवार वाले हर पल उसकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।
उधर. डीसी कुल्लू तोरुल एस. रवीश ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बताया कि प्रशासन और सरकार पीड़ित परिवारों के हर दुख में उनके साथ खड़े हैं। सरकार ने सभी मृतकों के पार्थिव शरीरों को सम्मान के साथ उनके पैतृक निवास तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था की है। कश्मीर के निवासियों के शवों को हवाई मार्ग से श्रीनगर भेजा गया है। इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों को तत्काल राहत राशि भी प्रदान की गई है।








