शिमला से आई एक खबर ने हिमाचल प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐलान किया है कि कर्मचारियों के वेतनमान (पे-स्केल) से जुड़ी विवादित अधिसूचना को रद्द किया जाएगा। इस एक ऐलान ने उन हजारों कर्मचारियों को राहत की सांस दी है, जिनकी सैलरी पर 10 से 15 हजार रुपये की कटौती की तलवार लटक रही थी। मगर अभी इस नोटिफिकेशन वापस लेने से जुड़े आदेश होने बाकी हैं।
बता दें कि कुछ समय पहले प्रदेश के वित्त विभाग ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसने प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारियों में हड़कंप मचा दिया था। इस आदेश में 2022 में कर्मचारियों को दी गई वेतन वृद्धि की नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया गया था। आसान शब्दों में कहें तो सरकार ने सैलरी से जुड़े नियम की धारा 7-ए को खत्म कर दिया था। इसका सीधा असर लगभग 89 अलग-अलग वर्गों के कर्मचारियों पर पड़ना था। अगर यह फैसला लागू रहता तो उनकी मासिक सैलरी में 10,000 से 15,000 रुपए तक की भारी कटौती हो जाती। इस खबर के आते ही कर्मचारियों में भारी रोष और अनिश्चितता का माहौल बन गया था।
इस फैसले के खिलाफ कर्मचारी संगठन एकजुट हो गए। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर के नेतृत्व में कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद की। सोमवार को शिमला के पीटरहाॅफ में महासंघ के सदस्यों ने मुख्यमंत्री सुक्खू से मुलाकात की और इस फैसले से कर्मचारियों पर पड़ने वाले असर के बारे में विस्तार से बताया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कर्मचारियों की बात को गंभीरता से सुना और इस मामले पर तुरंत कार्रवाई का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि वित्त विभाग की ओर से कर्मचारियों से जुड़ी एक नोटिफिकेशन गलती से जारी हो गई थी। हम उसे अब रद्द कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जो बढ़ी हुई सैलरी कर्मचारियों को अब तक मिल चुकी है, उसे वापस नहीं लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि सरकार इन नियमों को भविष्य में होने वाली नई भर्तियों पर लागू करने के बारे में विचार कर सकती है। इसका मतलब है कि मौजूदा कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।








