कुछ दास्तां और तस्वीरें ऐसी होती हैं जो सीधे दिल में उतर जाती हैं। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में भी एक ऐसा ही मार्मिक और दिल छू लेने वाला पल देखने को मिला, जिसकी चर्चा आज हर तरफ हो रही है। आपदा के जख्म देखने हिमाचल आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात उस मासूम बच्ची से हुई, जिसने कुछ महीने पहले ही एक प्राकृतिक आपदा में अपना सब कुछ खो दिया था। इस बच्ची की दर्दभरी कहानी सुनकर पीएम मोदी न केवल भावुक हुए, बल्कि उन्होंने उसे अपनी गोद में उठाकर दुलार किया। यह मुलाकात उस समय और भी खास हो गई जब प्रधानमंत्री ने अपनी जेब से कुछ टॉफियां निकालकर उस बच्ची को दीं।
मंडी जिले के सराज की रहने वाली लगभग एक साल की नितिका जब अपनी बुआ किरण के साथ प्रधानमंत्री के सामने पहुंची तो माहौल पूरी तरह बदल गया। जैसे ही पीएम मोदी को बताया गया कि इस बच्ची ने 29 जून की रात बादल फटने की त्रासदी में अपने माता-पिता और दादी को हमेशा के लिए खो दिया, तो वे एक पल के लिए शांत हो गए और उनकी आंखों में दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने तुरंत बच्ची को अपनी गोद में उठा लिया और उसे प्यार करने लगे। दर्द से अनजान वह मासूम बच्ची भी प्रधानमंत्री से ऐसे घुल-मिल गई मानो वो उसके अपने हों। कभी वह उनकी दाढ़ी खींचती, तो कभी उनके चश्मे पर हाथ मारती। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गया।
यह मासूम बच्ची उस भयावह रात की गवाह है, जब 29 जून को मंडी के तलवाड़ा में बादल फटने से भारी तबाही मची थी। उस रात नितिका के माता-पिता और दादी घर के बाहर पानी के तेज बहाव को देखने निकले थे, लेकिन सैलाब की ताकतवर लहरें उन्हें अपने साथ बहा ले गईं। उस तबाही के बीच 9 महीने की नितिका घर के अंदर सोती रही और सुरक्षित बच गई। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था कि जिस घर का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, उसी घर ने एक मां की तरह इस बच्ची को सुरक्षित अपनी गोद में संभाले रखा।
इस त्रासदी के बाद पूरे देश से नितिका को गोद लेने के प्रस्ताव आए, लेकिन उसकी चाची और बुआ ने फैसला किया कि वे खुद इस बच्ची का पालन-पोषण करेंगी। आज नितिका अपनी बुआ किरण की देखरेख में पल रही है। आज जब यह बच्ची पीएम मोदी की गोद में आई तो दुनिया ने एक बार फिर उसके दर्द को महसूस किया।
कुछ देर हंसी-मजाक के बाद जब दोनों के अलग होने का समय आया तो पीएम मोदी ने अपनी जेब से कुछ टॉफियां निकालीं और बच्ची की बुआ के हाथ में दे दीं। ये वही टॉफियां हैं जो कभी 25-50 पैसे में मिलती थीं और आज भी बच्चों की पहली पसंद हैं। इन टॉफियों में बच्चों की पसंदीदा ‘एल्पेनलीबे’ और ‘हाजमोला कैंडी’ शामिल थीं। यह छोटी-सी बात प्रधानमंत्री के जमीन से जुड़े व्यक्तित्व और उनकी सादगी को दर्शाती है कि देश का सर्वोच्च नेता भी आम लोगों की तरह ही सामान्य चीजें पसंद करता है और अपने साथ रखता है।
खैर पूरा देश आज देश की इस बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना कर रहा है। उम्मीद है कि कुदरत ने उसे जितना बड़ा दर्द दिया है, भविष्य में वह उतनी ही बड़ी सफलता हासिल करेगी और उसका परिवार स्वर्ग से उसे देखकर गर्व महसूस करेगा।








