देश की रक्षा करने का जज्बा रखने वाले हिमाचल के एक और वीर सपूत ने अपने प्राणों की आहुति दे दी है। बिलासपुर सदर उपमंडल की कोठीपुरा पंचायत के चलहेली गांव के रहने वाले 26 वर्षीय अजय ठाकुर का कर्नाटक में निधन हो गया, जहां वह भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। जैसे ही उनकी शहादत की खबर गांव पहुंची ताे पूरे इलाके में मातम छा गया।
मंगलवार को जब सेना के वाहन में तिरंगे में लिपटा हुआ अजय का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, तो कोहराम मच गया। जिस बेटे को कुछ महीने पहले हंसते-खेलते विदा किया था, उसे शांत और तिरंगे में लिपटा देख मां और दादी की चीखें निकल गईं। उनका विलाप सुनकर वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।
सबसे हृदयविदारक दृश्य था शहीद अजय ठाकुर का 7 महीने का मासूम बेटा। इस सबसे बेखबर, उसे तो यह भी नहीं पता था कि उसके सिर से पिता की छांव हमेशा के लिए छिन गई है। परिवार के लोग उसे बहलाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसकी मासूम आंखें शायद भीड़ में अपने पापा को ही ढूंढ रही थीं। यह देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया।
वहीं, शहीद की पत्नी का हाल देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। छोटी सी उम्र में ही उनका साथ छूट गया। जब पति का पार्थिव शरीर ताबूत में घर के आंगन में रखा गया, तो वह बार-बार हाथ लगाकर उसे रोकने की कोशिश करती रहीं, मानो कह रही हों कि अभी मत जाओ, अभी तो पूरी जिंदगी बाकी थी। उनकी आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
शहीद अजय ठाकुर का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ किया गया। सेना के जवानों ने उन्हें शस्त्र झुकाकर सलामी दी। इस दाैरान जब तक सूरज चांद रहेगा, अजय तेरा नाम रहेगा’ और ‘अजय ठाकुर अमर रहे’ के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। जब शहीद के पिता के कांपते हाथों में वह तिरंगा आया, जो उनके बेटे के शरीर पर लिपटा हुआ था। जिस पिता ने कभी बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया था, आज उसी के बेजान शरीर का सम्मान थामते हुए वह खुद को संभाल नहीं पाए और फूट-फूटकर रो पड़े। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर किसी की आंखों से आंसूओं का सैलाब उमड़ पड़ा।








