जिस एक जान को बचाने के लिए पूरा हिमाचल एकजुट हो गया था, जिसके लिए सड़कों से पहाड़ हटा दिए गए थे और जिसके लिए हजारों आंखें प्रार्थना में उठी थीं, वो अभिनव सांख्यान अब हमारे बीच नहीं रहा। कुल्लू के अखाड़ा बाजार में हुए दिल दहला देने वाले भूस्खलन के 15 दिन बाद 32 वर्षीय अभिनव ने बिलासपुर एम्स में अपनी आखिरी सांस ली। इस खबर के साथ ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।
4 सितम्बर का दिन कुल्लू के लिए एक त्रासदी लेकर आया था। अखाड़ा बाजार में पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर 2 घरों पर आ गिरा, जिससे सब कुछ मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। इस हादसे में 10 लोग मलबे में दब गए थे। बचाव अभियान के दौरान 6 लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि अभिनव और 2 अन्य महिलाओं को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया। अभिनव की हालत बेहद नाजुक थी और यहीं से शुरू हुई उसे बचाने की एक अभूतपूर्व जंग।
अभिनव को बेहतर इलाज की जरूरत थी, जिसके लिए उसे कुल्लू से बिलासपुर एम्स रैफर किया गया था, लेकिन यह सफर आसान नहीं था। खराब मौसम के कारण एयरलिफ्ट करना असंभव था। वहीं भूस्खलन के चलते कुल्लू-मंडी नैशनल हाईवे जगह-जगह बंद पड़ा हुआ था। ऐसे में जो हुआ, वह हिमाचल के जज्बे की मिसाल बन गया। कुल्लू और मंडी पुलिस ने मिलकर अभिनव की एंबुलैंस के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाया। एनएचएआई की मशीनें एंबुलैंस के आगे-आगे रास्ता साफ करती रहीं और एक-एक इंच मलबा हटाकर अभिनव को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया। यह एक ऐसा दृश्य था जहां पूरा सरकारी तंत्र सिर्फ एक जिंदगी को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहा था। उस दिन 4 घंटे के सफर काे मात्र अढ़ाई घंटे में पूरा किया गया था।
एम्स बिलासपुर में डॉक्टर लगातार अभिनव की जान बचाने की कोशिश करते रहे। पूरा प्रदेश उसके ठीक होने की कामना कर रहा था, लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर था। 15 दिनों तक मौत से लड़ने के बाद आखिरकार अभिनव जिंदगी की जंग हार गया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया है। अभिनव का अंतिम संस्कार उनके ननिहाल दियार गांव में किया जाएगा, जहां परिवार और पूरा गांव इस बहादुर बेटे को नम आंखों से विदाई देगा।
वहीं कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने इस अभिनव की माैत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा थी, जिसमें हमने कई जानें खो दीं। अभिनव को बचाने की हरसंभव कोशिश की गई। सरकार प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव राहत प्रदान की जाएगी।
अभिनव की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह उस उम्मीद का टूटना है जिसे पूरे हिमाचल ने मिलकर संजोया था। वह चला गया, लेकिन अपने पीछे एक जान बचाने के लिए की गई सामूहिक कोशिशों की एक अविस्मरणीय कहानी छोड़ गया है।
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