इसे कुदरत का करिश्मा कहें या किस्मत का खेल, एक भयंकर भूस्खलन के 16 घंटे बाद एक शख्स मलबे के ढेर से जिंदा बाहर निकला, लेकिन तब तक वह अपनी पत्नी और 2 मासूम जुड़वां बच्चों को खो चुका था।
यह दर्दनाक हादसा उत्तराखंड के चमोली के नंदानगर इलाके में गुरुवार को हुआ। कुंवर सिंह अपने परिवार पत्नी कांता देवी और 10 साल के जुड़वां बेटों विकास और विशाल के साथ घर में सो रहे थे। उन्हें क्या पता था कि बाहर बरसती आफत उनके घर को ही कब्रगाह बना देगी। आधी रात में हुए भारी भूस्खलन ने उनके घर को हजारों टन मलबे के नीचे दफन कर दिया। जब सुबह हुई तो वहां घर का नामोनिशान तक नहीं था।
रैस्क्यू टीमों ने दिनभर मलबा हटाने का काम किया, लेकिन किसी के बचने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। समय बीतता जा रहा था और उम्मीदें दम तोड़ रही थीं। लेकिन शुक्रवार को लगभग 16 घंटे बाद जब बचावकर्मी मलबा हटा रहे थे, तो उन्हें अंदर से एक धीमी आवाज सुनाई दी। यह आवाज कुंवर सिंह की थी, जो मलबे में दबे हुए अपने कुलदेवता और बिनसर महादेव का नाम जप रहा था।
एक उम्मीद की किरण जगते ही रैस्क्यू ऑप्रेशन में तेजी लाई गई। कटर से छत को काटकर और हाथाें से मलबे काे हटाकर जब बचावकर्मी अंदर झांके, तो उन्होंने कुंवर सिंह को जीवित पाया। जैसे ही कुंवर सिंह को सुरक्षित बाहर निकाला गया, वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर इस चमत्कार का स्वागत किया, लेकिन यह खुशी चंद पलों की ही थी। कुंवर सिंह के बाहर आते ही टीमों ने उसके परिवार की तलाश तेज कर दी। कुछ ही देर बाद मलबे में कुंवर सिंह की पत्नी कांता देवी और दोनों जुड़वां बेटों के शव मिले। इस दृश्य को देखकर बचाव दल के सदस्यों समेत वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक पड़ीं।
कुंवर सिंह ने मौत और जिंदगी के बीच के वो 16 घंटे अपनी पत्नी और बच्चों के शवों के साथ बिताए थे। इस भयावह अनुभव ने उसे गहरे सदमे में डाल दिया है। वह अभी कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है, बस बार-बार अपने कुलदेवता का नाम ले रहा है। बता दें कि जिस पहाड़ी में बादल फटने से तबाही मची… वहां बिनसर महादेव के रुप में शिव का मंदिर भी है। कुंवर सिंह का बचना किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन भगवान ने उसे एक ऐसी जिंदगी बख्शी है, जिसमें उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ गई।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह बिनसर महादेव का ही आशीर्वाद है कि इतनी बड़ी आपदा में भी कुंवर सिंह की जान बच गई, लेकिन इस चमत्कार के साथ मिले असहनीय दर्द का बोझ अब उसे अकेले ही उठाना होगा। हम मृतकों की आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना करते हैं।








