कुदरत के कहर ने एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।। उत्तराखंड के चमोली के नंदानगर में हुए भयंकर भूस्खलन के 18 घंटे बाद जब बचाव दल ने मलबा हटाया, तो वहां ममता का एक ऐसा मंजर दिखा, जिसने पत्थर दिल को भी पिघला दिया। एक मां अपने दो जुड़वां बेटों को अपनी बांहों में ऐसे समेटे हुए थी, जैसे उन्हें दुनिया की हर बला से बचाने की कोशिश कर रही हो। वे जैसे सोए थे, वैसे ही मौत की गहरी नींद में समा गए।
यह दर्दनाक हादसा गुरुवार को हुआ, जब बादल फटने जैसी बारिश के कारण आए हजारों टन मलबे ने कुंवर सिंह के घर को अपनी चपेट में ले लिया। पूरा परिवार घर के अंदर ही दब गया। दिनभर की तलाश के बाद भी जब किसी का पता नहीं चला तो उम्मीदें टूटने लगी थीं, लेकिन शुक्रवार को मलबे के अंदर से एक धीमी आवाज ने बचाव अभियान में नई जान फूंक दी।
करीब 16 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बचाव दल ने परिवार के मुखिया कुंवर सिंह को मलबे से जिंदा बाहर निकाला। बताया जा रहा है कि वह मलबे में दबे हुए लगातार अपने कुल देवताओं और बिनसर महादेव का जाप कर रहा था। उसके बचने से एक पल के लिए खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन यह खुशी अधूरी थी, क्योंकि उसका पूरा संसार तो अभी भी मलबे में ही दबा था।
कुंवर सिंह के बाहर निकलते ही उसकी पत्नी कांता और 10 वर्षीय जुड़वां बेटों विकास और विशाल की तलाश तेज कर दी गई। 2 घंटे बाद जब बचाव दल उस जगह पहुंचा जहां परिवार सोया करता था, तो वहां का दृश्य देख सभी सिहर उठे। बिस्तर पर मां कांता अपने दोनों बेटों को सीने से चिपकाए हुए मिलीं। बच्चे अपनी मां की छाती से ऐसे लिपटे थे, मानों वह उन्हें दूध पिलाते-पिलाते सुला रही हो। तीनों जैसे सुकून से सोए थे, उसी हालत में हमेशा के लिए सो गए। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया। जिन लोगों ने अब तक खुद को संभाले रखा था, वे भी यह देखकर फूट-फूट कर रो पड़े।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मां का प्यार दुनिया में सबसे नि:स्वार्थ और शक्तिशाली होता है। सच ही कहते हैं, “दुनिया के हर रिश्ते में कुछ अधूरा-आधा निकलेगा, एक मां का प्यार है जो दूसरों से नौ महीने ज्यादा निकलेगा।” कांता ने मरते दम तक अपने जिगर के टुकड़ों का साथ नहीं छोड़ा। शायद आखिरी सांस तक वह उन्हें बचाने की कोशिश करती रही होगी। इस हादसे में एक औरत ताे जिंदगी की जंग हार गई, लेकिन एक मां की ममता हमेशा के लिए अमर हाे गई।
भगवान ने कुंवर सिंह की जिंदगी तो बख्श दी, लेकिन जीने की वजह ही छीन ली। 16 घंटे तक वह अपनी पत्नी और बच्चों के शवों के साथ मलबे में दबा रहा, मौत और जिंदगी के बीच झूलते रहा, लेकिन बाहर निकला तो सब कुछ खत्म हो चुका था।








