हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से एक ऐसी हृदय विदारक खबर सामने आई है, जिसने हर सुनने वाले का दिल दहला दिया है। उपमंडल बंगाणा की बल्ह पंचायत में गुरुवार का दिन 2 परिवारों पर ऐसा कहर बनकर टूटा, जिसका दर्द उम्रभर रहेगा। यहां छपरोह खड्ड के गहरे पानी में डूबने से तीन मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों और मिली जानकारी के अनुसार यह दर्दनाक हादसा गुरुवार कों हुआ। स्थानीय विद्यालय में पढ़ने वाली तीन सहेलियां खुशी पुत्री मनजीत, कोमल और सोनाक्षी पुत्री अजय कुमार अपने स्कूल बैग धोने के लिए गांव के पास ही बहने वाली छपरोह खड्ड पर गई थीं। बैग साफ करते हुए अचानक एक बच्ची का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में जा गिरी। अपनी सहेली को डूबता देख बाकी दोनों बच्चियों ने एक पल भी नहीं सोचा और उसे बचाने के लिए पानी में उतर गईं, लेकिन उन्हें पानी की गहराई का अंदाजा नहीं था। वे अपनी सहेली को बचाने की कोशिश में खुद भी डूब गईं।
जब देर शाम तक तीनों बेटियां घर नहीं लौटीं तो परिजनों कों चिंता हुई। उन्होंने गांव वालों के साथ मिलकर उनकी तलाश शुरू कर दी। खोजते-खोजते जब वे खड्ड के पास पहुंचे तो वहां एक बच्ची की चप्पल पड़ी मिली। थोड़ा आगे जाकर जो मंजर दिखा, उसने ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसका दी। तीनों बच्चियों के शव पानी में पड़े हुए थे। लोगों ने हिम्मत जुटाकर तीनों को पानी से बाहर निकाला और फौरन स्थानीय अस्पताल, इस उम्मीद में कि शायद कोई चमत्कार हो जाए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।
जैसे ही यह खबर गांव में फैली तों पूरे इलाके में मातम पसर गया। वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन घरों में कुछ घंटे पहले बच्चियों की खिलखिलाहट गूंज रही थी, वहां अब मातम और चीख-पुकार है। हर कोई इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा कि जो बच्चियां सुबह हंसते-खेलते घर से गईं थीं वे अब कभी लौटकर नहीं आएंगी।
इस दर्दनाक हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि खड्ड के किनारे खतरनाक जगहों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं या बाड़बंदी की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दुख न झेलना पड़े और किसी और की गोद सूनी न हो।








