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दुखद: सड़क हादसे में हिमाचल ने खाेए 2 वीर जवान, करवाचाैथ के टूटे सपने…पत्नी ने लाल जोड़े में दी शहीद पति को अंतिम विदाई

त्याैहार की खुशियां मनाने के लिए घर लौट रहे हिमाचल के दो वीर सपूतों की घर वापसी अधूरी रह गई। पंजाब के रूपनगर (रोपड़) के पास हुए एक भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की उम्मीदों और सपनों को हमेशा के लिए कुचल दिया। इस दर्दनाक घटना में कांगड़ा और मंडी जिले के दो सेवारत सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका एक साथी गंभीर रूप से घायल है, जो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार फिरोजपुर में तैनात तीन सैनिक दोस्त कांगड़ा के मुल्थान तहसील के धरमाण गांव निवासी 26 वर्षीय दलीप कुमार, मंडी के गोहर उपमंडल के थाची गांव निवासी 26 वर्षीय ढमेश्वर दत्त और सिरमौर जिला के पांवटा साहिब निवासी आशीष छुट्टी लेकर अपनी निजी कार में घर के लिए निकले थे। उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनका आखिरी सफर बन जाएगा। रूपनगर के पास उनकी कार की एक अन्य वाहन से आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और दलीप व ढमेश्वर की मौके पर ही सांसे थम गईं। वहीं, आशीष गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें श्री चमकौर साहिब अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस हादसे की सबसे हृदय विदारक कहानी शहीद ढमेश्वर दत्त की है। करीब 5 वर्ष पूर्व सेना में भर्ती हुए ढमेश्वर दत्त 8 माह पहले ही बेटी के पिता बने थे। वह करवाचौथ का त्याैहार अपनी पत्नी के साथ मनाने के लिए घर लौट रहे थे। उनकी 25 वर्षीय पत्नी ज्योति, 3 साल का बेटा और 8 महीने की मासूम बेटी बेसब्री से उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन वे आए भी ताे तिरंगे में लिपट कर। जिस लाल जोड़े में ज्योति को अपने पति का दीदार कर उनकी लंबी उम्र की कामना करनी थी, किसे पता था कि उसी लाल जोड़े में उसे अपने शहीद पति को अंतिम विदाई देनी पड़ेगी। यह दृश्य देख हर किसी का कलेजा कांप उठा और आंखें छलक पड़ीं। ढमेश्वर का पार्थिव शरीर जब थाची गांव पहुंचा, तो पूरे गांव का माहाैल गमगीन हाे गया।

वहीं, कांगड़ा के शहीद दलीप कुमार अविवाहित थे। उनके बड़े भाई भी भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं। जवान बेटे की असामयिक मौत से परिवार, धरमाण गांव और पूरे इलाके में मातम पसर गया है। दोनों शहीद जवानों का उनके पैतृक गांवों के श्मशानघाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। जब उनके पार्थिव शरीरों को मुखाग्नि दी गई तो परिवार वालों के साथ-साथ वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। इन दो सपूतों की असामयिक मौत ने पूरे हिमाचल को झकझोर कर रख दिया है।

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Author: Desk

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