बिलासपुर जिला के एक युवक की गुजरात में हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। उक्त युवक अपने परिवार का इकलौता सहारा था, जिसके सिर पर अपनी बूढ़ी मां और तीन मासूम बेटियों की जिम्मेदारी थी। इस हादसे ने उस परिवार की कमर तोड़कर रख दी है, जिसकी किस्मत पहले से ही इम्तिहान ले रही थी। 5 साल पहले ही बच्चियों के सिर से मां का साया उठ चुका था और अब क्रूर विधाता ने उनके पिता को भी छीन लिया।
जानकारी के अनुसार मलारी निवासी कुलदीप गुजरात में ट्रक चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। यह दर्दनाक हादसा सुबह 3 बजे के आसपास गुजरात से करीब 200 किलोमीटर आगे हुआ। कुलदीप अपने ट्रक में पाइप लोड करके गुजरात की ओर आ रहा था, जब यह अनहोनी हुई। हादसा इतना भयावह था कि ट्रक के परखच्चे उड़ गए। पाइपों के भारी वजन ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया, जिससे कुलदीप को संभलने का कोई मौका नहीं मिला। बताया जा रहा है कि मदद पहुंचने से पहले ही कुलदीप ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।
कुलदीप का जीवन संघर्षों और जिम्मेदारियों से भरा था। करीब 5 साल पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था। उनके पिता भी 12-13 साल पहले गुजर चुके थे। पत्नी की मौत के बाद तीन बेटियों की परवरिश में आ रही दिक्कतों के चलते कुलदीप ने अपनी एक बेटी को एक रिश्तेदार को गोद दे दिया था। बाकी दो बेटियां अपनी दादी के पास गांव में ही रहती थीं, जबकि कुलदीप घर से दूर रहकर परिवार का पेट पाल रहा था। वह अपनी बूढ़ी मां और बेटियों का एकमात्र सहारा था, लेकिन इस हादसे ने उनसे यह सहारा भी छीन लिया।
इस घटना की खबर जैसे ही गांव में पहुंची तो पूरे इलाके में मातम पसर गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। कुलदीप का शव अभी तक घर नहीं पहुंचा है, जिसके देर रात तक पहुंचने की उम्मीद है। हर कोई भगवान की इस क्रूरता पर सवाल उठा रहा है कि पहले से ही दुख झेल रहे परिवार के साथ इतनी बड़ी अनहोनी कैसे हो सकती है। खैर ईश्वर मृतक की आत्मा को शांति प्रदान करे और शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति दे।








