कहते हैं विश्वास में वो शक्ति होती है जो पत्थरों में भी प्राण फूंक सकती है। आस्था का ऐसा ही एक अकल्पनीय और रोंगटे खड़े कर देने वाला चमत्कार उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी के दरबार में देखने को मिला, जिसने विज्ञान और तर्क को एक बार फिर नतमस्तक होने पर मजबूर कर दिया। सोमवार की रात 35 वर्षों से खामोश एक जिंदगी में मां की कृपा से शब्दों की सरगम गूंज उठी।
पंजाब के होशियारपुर निवासी 35 वर्षीय सरजू शर्मा जो जन्म से ही बोलने और सुनने की शक्ति से वंचित थे, ने जैसे ही मां का चरणामृत ग्रहण किया, उनकी बंद जुबान खुल गई और उनके मुख से निकला पहला शब्द था “जय माता दी”। यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि 35 साल की खामोशी का टूटना था, एक परिवार की दशकों की प्रार्थना का फल था और मां चिंतपूर्णी की असीम कृपा का जीता-जागता प्रमाण था।
सरजू का परिवार पिछले 35 वर्षों से एक अनकही पीड़ा के साथ जी रहा था। परिवार ने अपने बेटे के इलाज के लिए कई अस्पतालों और डॉक्टरों के चक्कर काटे, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। पिछले तीन महीनों से तो सरजू की हालत और भी खराब हो गई थी और वह इशारों में भी अपनी बात मुश्किल से समझा पा रहे थे। लेकिन जहां विज्ञान की सीमाएं समाप्त होती हैं, वहां से आस्था का सफर शुरू होता है। सरजू के परिवार की मां चिंतपूर्णी में अटूट श्रद्धा थी। वे पहले भी कई बार यहां माथा टेकने आ चुके थे, इस उम्मीद में कि एक दिन मां उनकी पुकार जरूर सुनेंगी।
सोमवार की रात जब पूरा परिवार मां के दरबार में दर्शन के लिए पहुंचा तो माहौल भक्तिमय था। आरती के बाद जब पुजारी ने सरजू को चरणामृत दिया तो शायद किसी ने सोचा भी नहीं था कि अगले ही पल ऐसा कुछ हाेगा, जिसकी शायद ही कल्पना की जा सके। सरजू ने श्रद्धा से चरणामृत पिया और अचानक वह अपनी मां की ओर मुड़े और साफ आवाज में “जय माता दी” का जयकारा लगा दिया।
यह सुनते ही उनकी मां और पिता हतप्रभ रह गए। उन्हें अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ। चमत्कार सिर्फ इतना ही नहीं था, सरजू काे अब सब कुछ सुनाई भी दे रहा था। यह दृश्य देखकर पूरे परिवार की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। वहां मौजूद अन्य श्रद्धालु भी इस अविश्वसनीय घटना के साक्षी बने और पूरा मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंज उठा।
बोलने और सुनने की शक्ति वापस पाकर सरजू शर्मा की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने हाथ जोड़कर नम आंखों से मां चिंतपूर्णी के आगे सिर झुकाया और इस चमत्कार के लिए उनका आभार प्रकट किया। उनके चेहरे पर 35 साल की खामोशी टूटने की जो खुशी थी, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। फिलहाल यह घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और भक्तों की आस्था को और भी गहरा कर रही है। यह चमत्कार इस बात का प्रमाण है कि यदि मन में सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास हो तो मां की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है।
देखें वीडियाे…








