समाज में सास-बहू के रिश्ते को लेकर भले ही हजारों नकारात्मक धारणाएं हों, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो प्यार, समर्पण और अपनेपन की ऐसी मिसाल पेश कर जाते हैं कि दुनिया देखती रह जाती है। ऐसा ही एक अटूट रिश्ता हिमाचल प्रदेश में देखने को मिला, जो जीवन में ही नहीं, बल्कि मृत्यु में भी एक-दूसरे का साथी बना। यहां एक सास की मृत्यु का सदमा बहू इस कदर बर्दाश्त नहीं कर पाई कि उसने भी कुछ ही पलों में अपनी सास के पीछे-पीछे दुनिया को अलविदा कह दिया।
सास को मृत अवस्था में देख दहल गया बहू का दिल
यह हृदय विदारक घटना उपमंडल की आशापुरी पंचायत के रोपड़ी गांव की है। यहां 85 वर्षीय मकोड़ी देवी (पत्नी स्वर्गीय सर्वदयाल) ने मंगलवार को अपनी आखिरी सांस ली। परिवार के लोग अभी इस दुख से उबरने की कोशिश ही कर रहे थे कि एक और अनहोनी घट गई। अपनी सास को मृत अवस्था में देख 55 वर्षीय बहू रेखा देवी का दिल दहल गया। वह इस सदमे को सहन नहीं कर सकीं और अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। आसपास मौजूद लोगों ने घबराहट में रेखा देवी को संभालने की कोशिश की और तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। घर से महज डेढ़ किलोमीटर दूर ही रास्ते में रेखा देवी की सांसें भी थम गईं। जब तक वे अस्पताल पहुंचते, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मां-बेटी की तरह रखती थीं एक-दूसरे का ख्याल
इस घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। जो लोग मकोड़ी देवी के निधन पर शोक जताने आए थे, वे बहू रेखा देवी की मौत की खबर सुनकर सन्न रह गए। गांव के लोगों का कहना है कि सास-बहू में कभी कोई मनमुटाव नहीं देखा गया। दोनों मां-बेटी की तरह एक-दूसरे का ख्याल रखती थीं। उनका यह प्यार और लगाव ही था कि एक के जाने का गम दूसरा सहन नहीं कर सका। रेखा देवी के पति ओंकार एक मिस्त्री हैं और उनके दो बेटे रोजगार के सिलसिले में घर से बाहर रहते हैं। इस दोहरी त्रासदी ने पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।
एकसाथ होगा अंतिम संस्कार
बुधवार को जब रोपड़ी गांव के श्मशानघाट पर एक ही आंगन से सास और बहू की अर्थियां एक साथ उठेंगी, तो यह दृश्य हर किसी की आंखों को नम कर देगा। यह घटना सिर्फ एक दुखद संयोग नहीं, बल्कि सास-बहू के उस पवित्र रिश्ते की कहानी है, जिसने साथ जीने और साथ मरने की कहावत को सच कर दिखाया और समाज के लिए एक अविस्मरणीय मिसाल छोड़ गया।








