हिमाचल प्रदेश सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभाओं के लिए भी जाना जाता है, लेकिन इन प्रतिभाओं की चमक अक्सर सिस्टम की बेरुखी और संसाधनों की कमी के अंधेरे में खो जाती है। ऐसी ही एक कहानी है हमीरपुर जिले के दुर्गम गांव जंदडू की बेटी आकांक्षा कुमारी की, जिनके पदकों की खनक तो पूरी दुनिया ने सुनी, लेकिन उनके संघर्ष की सिसकियां शिमला में बैठे हुक्मरानों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
सपनों की उड़ान के आगे आर्थिक तंगी की दीवार
अंतर्राष्ट्रीय ताईक्वांडो एथलीट आकांक्षा कुमारी वह नाम है, जिसने हाल ही में दक्षिण कोरिया में आयोजित ‘विश्व ताईक्वांडो विश्व कप टीम चैंपियनशिप 2024’ में भारत का प्रतिनिधित्व कर तिरंगे का मान बढ़ाया। उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने तमिलनाडु में ‘चैंपियन ऑफ चैंपियंस’ का स्वर्ण पदक और महाराष्ट्र में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कांस्य पदक जीत चुकीं आकांक्षा की आंखों में अब एक बड़ा सपना है एशियाई खेल 2026 और लॉस एंजिल्स ओलिंपिक 2028 में देश के लिए पदक जीतना, लेकिन इन सपनों की उड़ान के आगे आर्थिक तंगी की दीवार खड़ी है। आकांक्षा भरे मन से कहती हैं कि हिमाचल खेलों के मामले में हरियाणा और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों से कोसों पीछे है। सरकारें दावे तो बहुत करती हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है।
सपनों के लिए छोड़ना पड़ा घर
यह विडंबना ही है कि हिमाचल की बेटी को अपने सपनों को जिंदा रखने के लिए अपना ही प्रदेश छोड़ना पड़ा है। बेहतर ट्रेनिंग और सुविधाओं के अभाव में आकांक्षा आज हरियाणा में रहकर अभ्यास करने को मजबूर हैं। वह कहती हैं कि मुझे ओलिंपिक के लिए जिस स्तर की ट्रेनिंग और डाइट चाहिए, वह अपने बलबूते पर जुटाना नामुमकिन-सा हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए जरूरी आर्थिक सहयोग नहीं मिल पा रहा, जिससे मैं बड़े मौकों से चूक रही हूं।
सरकार मदद करे तो ओलिंपिक में मैडल पक्का
आकांक्षा को कुछ साल पहले एक पूर्व केंद्रीय मंत्री से 2 लाख और एक संस्था से 1 लाख रुपए की मदद मिली थी, जिसके सहारे वह राष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय कर पाईं, लेकिन ओलिंपिक का सपना इससे कहीं बड़ा है। उनकी आवाज में एक उम्मीद और दर्द साफ झलकता है, वह कहती हैं कि मैं ओलिंपिक खेलना चाहती हूं। अगर सरकार और हमारा खेल विभाग थोड़ा सा सहयोग कर दे तो मैं विश्वास दिलाती हूं कि न सिर्फ ओलिंपिक में खेलूंगी, बल्कि देश के लिए पदक भी जीतकर लाऊंगी।
सरकारी सहयोग के इंतजार में हिमाचल की अनगिनत प्रतिभाएं
आकांक्षा की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि हिमाचल की उन अनगिनत प्रतिभाओं की है जो सरकारी सहयोग की एक किरण का इंतजार कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या हमारा सिस्टम इन चमकते सितारों को यूं ही गुमनामी के अंधेरे में खो जाने देगा या उनके सपनों को पंख लगाकर उन्हें आसमान छूने का मौका देगा? आकांक्षा की उम्मीद भरी आंखें इसी सवाल का जवाब ढूंढ रही हैं।








