फिल्मों में आपने बिछड़े हुए भाइयों के मिलने की कहानियां तो बहुत देखी होंगी, लेकिन कांगड़ा के बैजनाथ में एक ऐसी हकीकत सामने आई है, जिसने किसी भी फिल्मी कहानी को पीछे छोड़ दिया है। यहां एक शख्स 47 साल बाद अपने घर लौटा है। जब वो गया था तो 11 साल का एक बच्चा था और जब लौटा तो 58 साल का एक अधेड़, जिसके चेहरे पर वक्त की सिलवटें और आंखों में अपनों से मिलने की अधूरी हसरत थी। यह देखकर सब हैरान रह गए।
चाची ने एक पल में पहचान लिया भतीजा
गुरुवार काे बैजनाथ के धानग गांव में एक 58 वर्षीय शख्स दाखिल हुआ। उसकी नजरें अपने पुराने घर को ढूंढ रही थीं, जो अब वक्त की मार सहते-सहते एक खंडहर बन चुका था। टूटी दीवारों को देखकर उसकी आंखें भर आईं। इसके बाद वह पास ही अपनी चाची के घर पहुंचा। चाची ने उसे एक पल में ही पहचान लिया, क्योंकि उसका चेहरा हू-ब-हू उसकी मां से मिलता था। बस फिर क्या था, गांव में शोर मच गया… “प्रकाश लौट आया है!”

गले लगकर फूट-फूट कर रोए भाई
यह खबर जब बड़े भाई कर्म चंद के कानों तक पहुंची तो एक पल के लिए उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। वो भागे-भागे उस जगह पहुंचे और जैसे ही 47 साल बाद अपने छोटे भाई को सामने देखा तो सन्न रह गए। दोनों भाइयों की आंखें मिलीं और भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। वे एक-दूसरे के गले लगकर फूट-फूट कर रोने लगे। यह मंजर देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। 47 साल का इंतजार, उम्मीद और दर्द आंसुओं में बह रहा था।
पैसा कमाने के जुनून में छाेड़ा था घर
जब प्रकाश चंद 11 साल के थे ताे उनके मन में पैसा कमाने का ऐसा जुनून सवार हुआ कि वह घर छोड़कर कुल्लू चले गए। उस दौर में न तो मोबाइल फोन थे और न ही संपर्क का कोई आसान जरिया। प्रकाश ने बताया कि उन्हें अपनी गलती का एहसास तो हुआ, लेकिन दो वजहों से वह कभी लौट नहीं पाए। एक मां-बाप की डांट का डर और दूसरा उनके पास घर वापस लौटने के लिए कभी इतने पैसे जमा ही नहीं हो पाए।
मां-बाप चल बसे पर भाई की उम्मीद जिंदा रही
प्रकाश चंद के जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। मां-बाप ने बेटे को हर जगह ढूंढा, हर मंदिर में मन्नत मांगी, लेकिन प्रकाश का कोई सुराग नहीं मिला। बेटे को एक बार देखने की हसरत लिए ही दोनों इस दुनिया से चल बसे। कानूनन 7 साल बाद गुमशुदा व्यक्ति का डैथ सर्टिफिकेट भी बन जाता है, लेकिन बड़े भाई कर्म चंद का दिल यह मानने को तैयार नहीं था। उन्हें अटूट विश्वास था कि उनका छोटा भाई एक दिन जरूर लौटेगा और 47 साल बाद उनका यह यकीन सच में बदल गया।
चंबा में की शादी, तीन बच्चाें के हैं पिता
प्रकाश चंद अब चंबा के तीसा में मजदूरी करते रहे। वहीं उन्होंने शादी की और अब उनके तीन बच्चे भी हैं। आज उन्हें भाइयों से मिलकर खुशी तो है, लेकिन इस बात का गहरा मलाल है कि जब वह लौटा तो उसे डांटने और आशीर्वाद देने के लिए न मां थी, न बाप। आज प्रकाश अपने गांव की उन गलियों और रास्तों को फिर से निहार रहे हैं, जहां कभी उनका बचपन गुजरा था।








