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हमीरपुर: गांव की महिलाओं में ‘मां’ को ढूंढता गोलू …जयराम ठाकुर ने पास बिठाया तो भाग गया

मातम में डूबे उस आंगन में आज लाेगाें का जमावड़ा था, इंसाफ की मांगें थीं और भविष्य की चिंताएं थीं, लेकिन इन सबके बीच एक मासूम की निगाहें बस भीड़ में किसी एक चेहरे को तलाश रही थीं और वाे था उसकी अपनी मां का चेहरा। यह गोलू है, जिसकी दुनिया उसकी मां के साथ ही चली गई। वह ठीक से बोल भी नहीं पाता, उसकी खामोश सिसकियां और इशारे वहां मौजूद हर शख्स के दिल को चीर रहे थे। फोन करो… मां से बात करा दो, गोलू गांव की महिलाओं के आंचल पकड़कर बस यही कह रहा है। उसे नहीं पता कि उसकी मां अब उस दुनिया में चली गई है, जहां से कोई फोन नहीं आता, जहां से कोई वापस नहीं लौटता। काश, भगवान के धाम का भी कोई नंबर होता तो शायद गोलू की यह मासूम इच्छा पूरी हो जाती।

दर्द बांटने पहुंचे नेता पर कैसे मिटाएं मां की कमी

गोलू के सिर पर हाथ रखने व उसका दर्द बांटने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पूर्व विधायक राजेंद्र राणा, विधायक आशीष शर्मा और अभिषेक राणा पहुंचे। उन्होंने गोलू को अपने बीच बिठाया, उसे दुलारा और हरसंभव मदद का भरोसा दिया, लेकिन गोलू को जैसे किसी चीज से काेई लेना-देना नहीं था। उसकी आंखों में बस एक ही सवाल था “मेरी मां कहां है?” नेताओं व लोगों ने गोलू को न्याय दिलाने की बात की, हत्यारे को कड़ी सजा दिलाने का वायदा किया, बाल अपराध कानून में बदलाव की चर्चा की, लेकिन इन सब भारी-भरकम शब्दों के बीच गोलू की बस एक छोटी-सी, मासूम-सी चाहत थी, जिसे कोई पूरा नहीं कर सकता था।

आज है मातम का मेला, कल तन्हा रह जाएगा गोलू

यह एक कड़वी सच्चाई है कि आज इस दुख में 100 लोग शरीक हैं, कल पचास होंगे और धीरे-धीरे सब अपनी जिंदगी में लौट जाएंगे। लेकिन उस घर में हमेशा के लिए एक खालीपन छोड़ जाएंगे, जिसे भरने वाला कोई नहीं होगा। तड़पता रहेगा तो सिर्फ गोलू, जो इतना बेसहारा है कि उसे हर पल किसी के सहारे की जरूरत है। कोई शायद उसकी देखभाल की जिम्मेदारी उठा भी ले, लेकिन मां की ममता व परवरिश की छांव कहां से लाएगा? क्या कोई दूसरा उस तरह उसकी देखभाल कर पाएगा, जैसे उसकी मां करती थी। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जाते हुए गोलू के सिर पर हाथ फेरा व प्रदेश सरकार से इस मामले की गहनता से जांच कर मृतक रंजना को इंसाफ दिलाने की मांग की।

क्या था मामला?

बता दें कि 3 नवम्बर को एक 14 साल के नाबालिग ने सासन गांव निवासी रंजना के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी। रंजना ने जब इसका विरोध किया तो उस दरिंदे ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। 5 दिनों तक चंडीगढ़ PGI में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद रंजना ने दम तोड़ दिया और अपने पीछे छोड़ गई अपने मासूम गोलू की कभी न खत्म हाेने वाली तड़प।

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Author: Desk

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