तेजाब हमले का शिकार मंडी जिले के सरकाघाट की बेटी ममता के निधन ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। ममता अपनी सांसों की डोर तो छोड़ गईं, लेकिन अपने पीछे दो बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) को बिलखता छोड़ गईं। इस गहरे दुख और निराशा के बीच हिमाचल प्रदेश के युवा नेता एवं पूर्व एनएसयूआई व युवा कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष यदोपती ठाकुर ने इंसानियत की एक बड़ी मिसाल पेश की है।
मासूमों के सिर पर रखा हाथ
यदोपती ठाकुर ने ममता के निधन को मानवता के लिए शर्मनाक और अत्यंत दुखद बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक मां की कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता, लेकिन समाज का फर्ज है कि उन बच्चों को अकेला न छोड़ा जाए। इसी भावना के साथ यदोपती ठाकुर ने घोषणा की है कि वे ममता के दोनों बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उनकी स्कूल से लेकर कॉलेज तक की शिक्षा का पूरा खर्च अपने व्यक्तिगत स्तर पर उठाएंगे।
‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ बनाने की अपील
यदोपती ठाकुर ने बच्चों के जीवन को सुगम बनाने के लिए प्रदेश सरकार से भी गुहार लगाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. कर्नल धनी राम शांडिल से आग्रह किया है कि ममता के बच्चों को “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट-सुख आश्रय योजना” में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि इससे बच्चों को भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन-यापन की मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा और उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त होगा।
दोषी के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए मुकद्दमा
न्याय में देरी को अन्याय बताते हुए यदोपती ठाकुर ने प्रशासन से मांग की है कि इस जघन्य अपराध के दोषी के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकद्दमा चलाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा जल्द मिलनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल सके और समाज में कड़ा संदेश जाए कि महिलाओं के खिलाफ ऐसे अपराध अक्षम्य हैं।








