जिस उम्र में हाथों में किताबें और आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में अगर हाथों में हथकड़ी और जेब में ‘सफेद जहर’ (चिट्टा) मिले, तो यह सिर्फ पुलिस की कामयाबी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गहरी चिंता का विषय है। हमीरपुर में कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब पुलिस ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत 2 युवकाें काे चिट्टे के साथ काबू किया। इस दाैरान एक कड़वी सच्चाई भी सामने आई।
बुधवार की रात जब सदर थाना के एसएचओ इंस्पैक्टर कुलवंत सिंह अपनी टीम के साथ हमीरपुर की सड़कों पर गश्त कर रहे थे ताे इस दाैरान बस अड्डे पर उनकी नजर दो युवकों पर पड़ी। पुलिस को देखते ही उनके चेहरे की हवाइयां उड़ने लगीं। शक यकीन में बदला और जब तलाशी ली गई तो उनके पास से 105.23 ग्राम चिट्टा (हैरोइन) बरामद हुआ। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस जहर की कीमत करीब 10.50 लाख रुपए है। सोचिए, अगर यह खेप युवाओं तक पहुंच जाती तो कितने घरों के चिराग बुझ सकते थे।
इस गिरफ्तारी में सबसे चौंकाने वाला पहलू एक आरोपी की पहचान है। पुलिस की गिरफ्त में आया बिलासपुर जिले का रहने वाला युवक आयुष ठाकुर हमीरपुर के ही एक निजी संस्थान से डी.फार्मा (फार्मेसी) की पढ़ाई कर रहा है। जिस युवक को दवाओं का ज्ञान लेकर समाज को स्वस्थ बनाना था, वह चंद पैसों की खातिर नशे का वाहक बन गया। उसके साथ गिरफ्तार दूसरा युवक रजत मेहरा हमीरपुर के वार्ड नंबर-2 का ही रहने वाला है।
एसपी हमीरपुर भगत सिंह ठाकुर ने मामले की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी। पुलिस ने तो अपना काम बखूबी किया है, लेकिन मेडिकल क्षेत्र के छात्र का इस दलदल में धंसना अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों के लिए चिंता का विषय है। एनडीपीएस एक्ट के तहत दोनों अब सलाखों के पीछे हैं, लेकिन यह घटना सवाल छोड़ गई है कि आखिर हमारी युवा पीढ़ी किस दिशा में जा रही है?








