कहते हैं कि प्यार न सरहद देखता है, न मजहब और न ही रंग-रूप। प्यार तो बस रूह का अहसास है। इसी अहसास को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश की ‘पर्वतारोही बेटी’ अंजलि शर्मा ने। दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर भारत और हिमाचल का परचम लहराने वाली अंजलि ने जब अपने निजी जीवन का सबसे बड़ा फैसला लिया तो उन्होंने समाज की संकीर्ण सोच को दरकिनार कर सिर्फ अपने दिल की सुनी।
धर्मशाला के गमरु गांव की रहने वाली अंजलि ने 24 नवम्बर को अफ्रीका के रवांडा के रहने वाले यवेस काजियुका के साथ सात फेरे लिए। हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई यह शादी दो संस्कृतियों का खूबसूरत मिलन थी, लेकिन अफसोस कि सोशल मीडिया की दुनिया में कुछ लोगों को यह खुशी रास नहीं आई।
शादी की तस्वीरें और वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आए ताे ट्रोलर्स ने नवविवाहित जोड़े को निशाना बनाना शुरू कर दिया। अपनी उपलब्धियों से देश का मान बढ़ाने वाली अंजलि को उनकी पसंद के लिए ट्रोल किया गया। किसी ने यवेस के रंग पर सवाल उठाए, तो किसी ने पूछा कि “क्या हिमाचल में लड़के कम पड़ गए थे?” ये कमेंट्स न सिर्फ अंजलि और उनके पति के लिए अपमानजनक थे, बल्कि समाज की उस बीमार मानसिकता का भी परिचय दे रहे थे, जो आज भी इंसान को उसके गुणों से नहीं, बल्कि चमड़ी के रंग से तौलती है।
दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का हौसला रखने वाली अंजलि इस मानसिक प्रहार से टूटी नहीं, बल्कि उन्होंने उतनी ही मजबूती से जवाब दिया। अंजलि ने सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स को आईना दिखाते हुए लिखा कि “यह मेरी जिंदगी का फैसला है। हर कोई मेरी तरह ऐसे फैसले लेने की हिम्मत नहीं कर सकता। आप मेरी जगह होकर सोचिए।”
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उन्होंने आगे लिखा कि “लोग मेरे और मेरे पति के बारे में क्या कहते हैं, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। अहम यह है कि हम दोनों साथ में बहुत खुश हैं। मेरे पति मुझसे बेहद प्यार करते हैं और मेरी बहुत इज्जत करते हैं। जो लोग हमारी जिंदगी के बारे में कुछ नहीं जानते, उन्हें ऐसे कमेंट्स करने का कोई हक नहीं है।”
अंजलि के पति यवेस काजियुका पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और अमेरिका में कार्यरत हैं। दोनों की मुलाकात मास्को में हुई थी, जहां यह दोस्ती प्यार में बदल गई। यवेस ने न केवल अंजलि को अपनाया, बल्कि भारतीय संस्कृति और हिंदू रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए अग्नि के फेरे भी लिए।
गौरतलब है कि अंजलि शर्मा कोई आम लड़की नहीं हैं। साल 2009 में पिता के साये से महरूम होने के बाद उनकी मां पुष्पा शर्मा ने अकेले दम पर उन्हें पाला। अंजलि ने 2023 में अपनी पारंपरिक चंबा की गद्दी पोशाक ‘लुआंचड़ी’ पहनकर अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी ‘माऊंट किलिमंजारो’ फतह की थी। साड़ी पहनकर पर्वतारोहण करने और दो विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली अंजलि का नाम ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज है।
जिस बेटी ने हनुमान टिब्बा से लेकर रूस के एल्बुस पर्वत तक तिरंगा फहराया, आज उसे अपनी खुशियों के लिए समाज के तानों का सामना करना पड़ा। लेकिन अंजलि ने साबित कर दिया कि पहाड़ चढ़ना ही नहीं, बल्कि रूढ़िवादी सोच के खिलाफ खड़े होना भी एक बड़ा साहस हैष उनका यह फैसला बताता है कि असली सुंदरता विचारों में होती है, रंग में नहीं।








