हिमाचल प्रदेश के युवाओं में देश सेवा का जज्बा कूट-कूट कर भरा है। इसी कड़ी में जिला बिलासपुर के एक छोटे से गांव के बेटे ने अपनी मेहनत और लगन से ऐसी इबारत लिखी है, जिसने पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। 28 वर्षीय अभिषेक गुलेरिया, जो कभी सेना में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे, आज अपनी मेहनत के दम पर भारतीय सेना में लैफ्टिनैंट बनकर उभरे हैं।
बिलासपुर के झंडूता क्षेत्र के गांव कथ्यून के रहने वाले अभिषेक की सफलता के पीछे कड़ा संघर्ष छिपा है। उनके पिता राजकुमार एक साधारण किसान हैं, जिन्होंने ट्रैक्टर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण किया और बच्चों को अच्छी शिक्षा दी। अभिषेक के दादा तरसेम गुलेरिया भी सेना में थे, लेकिन पिता के किसान होने से यह परंपरा कुछ समय के लिए थम गई थी। अब अभिषेक और उनके भाई ने न केवल उस परंपरा को जीवित किया है, बल्कि घर की आर्थिक तंगी को भी हमेशा के लिए दूर कर दिया है।
अभिषेक 12वीं कक्षा पास करने के बाद ही भारतीय सेना की ‘129 आर्मी एयर डिफैंस रैजीमैंट’ में बतौर सिपाही भर्ती हो गए थे, लेकिन उनके सपनों की उड़ान अभी बाकी थी। सेना में रहते हुए अधिकारियों को देखकर उन्होंने भी वर्दी पर स्टार सजाने की ठानी। ड्यूटी की सख्त जिम्मेदारियों के बीच अभिषेक ने समय निकालकर पढ़ाई की और दिन-रात एक कर एसीसी (Army Cadet College) की परीक्षा पास की। कड़े प्रशिक्षण के बाद आईएमए (IMA) देहरादून में आयोजित पासिंग आऊट परेड में जब उनके माता-पिता ने उनके कंधों पर लैफ्टिनैंट के स्टार लगाए, तो वह पल भावुक कर देने वाला था।

इस कहानी का एक रोचक और गर्व करने वाला पहलू यह भी है कि अभिषेक के बड़े भाई धीरज भी सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। धीरज सेना में जवान हैं, जबकि छोटा भाई अभिषेक अब अफसर (लैफ्टिनैंट) बन गया है। तकनीकी रूप से छोटा भाई अब बड़े भाई का सीनियर ऑफिसर बन गया है, जो इस परिवार के लिए दोहरी खुशी का मौका है।
लैफ्टिनैंट बनने के बाद अभिषेक गुलेरिया को 23 गोरखा राइफल्स (23 GR) आबंटित की गई है और उनकी पहली पोस्टिंग पंजाब के गुरदासपुर में हुई है। अभिषेक न केवल पढ़ाई में होनहार हैं, बल्कि खेलकूद में भी काफी तेज-तर्रार हैं। अभिषेक की इस उपलब्धि से पूरा बिलासपुर जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है। अभिषेक की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं।








