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हिमाचल के लाल का कमाल, पहले ही अटैम्प्ट में CDS क्रैक कर पाया 14वां रैंक…21 साल की उम्र में बना लैफ्टिनैंट

हिमाचल प्रदेश को यूं ही ‘वीरभूमि’ नहीं कहा जाता। यहां की हवाओं में ही देशप्रेम बहता है और हर घर से सरहदों की हिफाजत के लिए एक कहानी निकलती है। ऐसी ही एक सुनहरी इबारत लिखी है सोलन जिला की अर्की तहसील के छोटे से गांव भराड़ीघाट के लाल नमन कुमार ने। महज 21 वर्ष की कच्ची उम्र में जब युवा अक्सर अपने भविष्य की दिशा तलाश रहे होते हैं, नमन ने भारतीय सेना में लैफ्टिनैंट बनकर अपने गांव और माता-पिता का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।

नमन की सफलता सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि वो सेना में अफसर बने हैं, बल्कि इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने यह मुकाम अपनी जिद्द और जुनून से हासिल किया है। यूपीएससी की कंबाइंड डिफैंस सर्विसेज (CDS) जैसी कठिन परीक्षा को नमन ने न केवल अपने पहले ही प्रयास में पास किया, बल्कि पूरे भारत में 14वां रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि पहाड़ के युवाओं का हौसला हिमालय से भी ऊंचा होता है।

नमन के लिए वर्दी सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक विरासत है। उनके पिता नरेंद्र कुमार ने अपना जीवन भारतीय सेना में बतौर नायब सूबेदार देश के नाम किया। घर में बचपन से ही अनुशासन और देशसेवा के किस्से सुनकर बड़े हुए नमन ने पिता के पदचिन्हों पर चलने की ठानी। फर्क बस इतना रहा कि पिता सूबेदार थे और उनकी तपस्या का फल आज बेटा ‘लैफ्टिनैंट’ बनकर घर लाया है। यह एक पिता के लिए सीना चौड़ा करने वाला पल था जब उन्होंने अपने बेटे को अफसर की वर्दी में देखा।

देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में पासिंग आऊट परेड के बाद वह पल सबसे भावुक कर देने वाला था, जब नमन की माता ममता वर्मा और पिता नरेंद्र कुमार ने अपने लाडले के कंधों पर सितारे सजाए। एक मां के लिए अपने बेटे को सेना की वर्दी में, कंधों पर चमकते सितारों के साथ देखना दुनिया की किसी भी दौलत से बड़ा सुख था। मां की नम आंखें और चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि आज उनकी परवरिश सफल हो गई।

नमन के लैफ्टिनैंट बनने की खबर जैसे ही भराड़ीघाट पहुंची ताे पूरा अर्की क्षेत्र खुशी से झूम उठा। स्थानीय लोगों का कहना है कि नमन ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे पक्के हों तो ग्रामीण परिवेश से निकलकर भी आसमान छुआ जा सकता है। नमन की यह उपलब्धि अब इलाके के हजारों युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बन गई है, जो सेना में जाकर भारत मां की सेवा करने का सपना देखते हैं।

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Author: Desk

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