देवभूमि हिमाचल में नशा किस कदर अपनी जड़ें जमा चुका है, इसकी बानगी पेश करते 2 अलग-अलग मामले सामने आए हैं। ये मामले न सिर्फ डराते हैं, बल्कि समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं? एक तरफ वह उम्र है जहां इंसान मोक्ष और आराम की तलाश करता है और दूसरी तरफ वह उम्र जहां सपनों की उड़ान होनी चाहिए। लेकिन अफसोस, दोनों ही पीढ़ियां नशे के इस काले कारोबार की गिरफ्त में हैं।
पहला मामला कुल्लू-मनाली का है, जहां पुलिस के हत्थे एक ऐसा शख्स चढ़ा, जिसे देखकर शायद ही कोई उसे अपराधी मानने को तैयार हो। 65 साल का व्यक्ति जिसके हाथों में इस उम्र में पोते-पोतियों का हाथ या भगवान की माला होनी चाहिए थी, वह नग्गर-पतलीकूहल रोड पर चरस की तस्करी करते पाया गया। पतलीकूहल पुलिस जब गश्त पर थी तो माहिली में आटा फैक्ट्री के पास इस बुजुर्ग की संदिग्ध हरकतों ने उसका ध्यान खींचा। जब तलाशी ली गई, तो पुलिस भी सन्न रह गई। बुजुर्ग के पास से 234 ग्राम चरस बरामद हुई। मंडी जिले के पुरानी मंडी के गांव भिऊली के रहने वाले इस बुजुर्ग धनराज ने बुढ़ापे की लाठी के बजाय अपराध का रास्ता चुना। डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने बताया कि पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आखिर किस मजबूरी या लालच ने एक बुजुर्ग को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
वहीं दूसरा मामला सोलन से आया है, जो भविष्य को लेकर और भी ज्यादा चिंतित करता है। यहां महज 19 साल का एक लड़का हाथों में कलम पकड़ने की उम्र में दूसरे छात्रों की नसों में ‘चिट्टा’ (हैरोइन) घोलने निकला था। सोलन पुलिस की डग्शाई टीम को सूचना मिली थी कि यह युवक पंचकूला से मौत का सामान (चिट्टा) लेकर आया है और सुल्तानपुर के आसपास शिक्षण संस्थानों के छात्रों को अपना शिकार बनाने वाला है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे धर दबोचा और उसके पास से 3.44 ग्राम चिट्टा बरामद किया। मंडी जिले के सुंदरनगर का रहने वाला यह नौजवान अब पुलिस की गिरफ्त में है। एक तरफ अभिभावक राहत की सांस ले रहे हैं कि उनके बच्चे बच गए, लेकिन दूसरी तरफ एक 19 वर्षीय युवक का अपराधी बन जाना समाज के लिए एक गहरा जख्म है।
गौर करने वाली बात यह है कि नशे के इस खेल में पकड़े गए 65 वर्षीय बुजुर्ग और 19 वर्षीय युवक दोनों का संबंध मंडी जिले से है। यह संयोग बताता है कि नशे का यह जाल उम्र, तजुर्बे और सीमाओं को नहीं देखता। पुलिस अपना काम मुस्तैदी से कर रही है और दोनों मामलों में कार्रवाई जारी है, लेकिन ये घटनाएं सवाल छोड़ जाती हैं कि क्या देवभूमि की आबोहवा को हम इस जहर से बचा पाएंगे?








