कुल्लू जिला के उपमंडल बंजार के अंतर्गत आती तीर्थन घाटी के गांव पेखड़ी में शुक्रवार की शाम अचानक उठी आग की लपटों से अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते काष्ठकुणी शैली में निर्मित 4 गऊशालाएं धू-धू कर जलने लगीं। ये गऊशालाएं लाल सिंह, मिलाप, गायत्री और भाग सिंह की बताई गई हैं, जिन्हें इस घटना में लाखाें रुपए का नुक्सान हुआ है।
पहाड़ पर जीवन जितना खूबसूरत होता है, चुनौतियां उतनी ही विकट होती हैं। आग बुझाने के लिए पानी की भारी किल्लत थी, लेकिन ग्रामीणों ने हार नहीं मानी। गांव में अफरा-तफरी के बीच हर हाथ मदद के लिए उठा। बच्चे, बूढ़े और जवान सबने मिलकर बाल्टियों और बर्तनों में पानी लाकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। अगर ग्रामीणों ने यह तत्परता न दिखाई होती तो शायद यह आग पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लेती।
गुशैणी से पेखड़ी का रास्ता संकरा होने के कारण दमकल की बड़ी गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच सकीं। फिर भी दमकल विभाग ने हार नहीं मानी और छोटा वाहन लेकर मौके पर पहुंचे। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि इस भयानक मंजर में किसी की जान नहीं गई। तहसीलदार बंजार नीरज शर्मा ने भी मौके की नजाकत को समझते हुए तुरंत नुक्सान के आकलन और प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
भले ही आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन ये घटना अपने पीछे कई सवाल और डर छोड़ गई है। अभी कुछ समय पहले ही घाटी के झनियार गांव ने भी ऐसा ही दर्द झेला था। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने घाटी के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।








