हिमाचल के ऊना स्थित बनगढ़ शाही परिवार के वंशज और कबड्डी खिलाड़ी दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया की हत्या के दाैरान एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत काे शर्मसार कर दिया है। एक बेईमान शख्स मौके का फायदा उठाकर राणा बलाचौरिया के लाखों के जेवर और रिवॉल्वर लेकर फरार हाे गया है।
CCTV में कैद हुआ नकली हमदर्द
15 दिसम्बर को जब मोहाली के सोहाना में राणा बलाचौरिया को गोलियां मारी गईं तो मौके पर मची अफरा-तफरी के बीच एक अज्ञात शख्स पहुंचा। उसने खुद को राणा का बेहद करीबी बताया और उनके शरीर से 5 तोले का सोने का कड़ा, 10 तोले की सोने की चेन और लाइसैंसी रिवॉल्वर अपने कब्जे में ले ली। लोगों ने सहानुभूति और भरोसे में आकर उसे सारा सामान सौंप दिया, जिसे लेकर वह रफूचक्कर हो गया।
बठिंडा का निकला आरोपी, पुलिस की पकड़ से बाहर
पुलिस ने जब घटनास्थल और आसपास के CCTV फुटेज खंगाले तो वह शख्स कई जगह कैद मिला। जांच में उसकी पहचान बठिंडा के मलोट क्षेत्र के निवासी के रूप में हुई है। मोहाली पुलिस ने वहां छापेमारी भी की, लेकिन आरोपी फिलहाल फरार है। पोस्टमार्टम के समय परिजनों ने पुलिस के सामने यह मुद्दा उठाया था, जिसके बाद सामान बरामदगी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
पैसे ले लो, पर आखिरी निशानी लौटा दो
इस घटना से आहत सोहाना कबड्डी कप के आयोजक और राणा के साथी रूपा सोहाना अब आगे आए हैं। उन्होंने हाथ जोड़कर आरोपी से विनती की है कि वह राणा की आखिरी निशानियां लौटा दे। रूपा ने ऐलान किया है कि यदि आरोपी ने यह सब लालच में किया है, तो क्लब उसे 15 तोले सोने और रिवॉल्वर की कीमत के बराबर नकद पैसे देने को तैयार है। उनका मकसद केवल बुजुर्ग माता-पिता तक उनके बेटे की आखिरी यादें पहुंचाना है।
10 दिन पहले ही रचाई थी शादी
दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया का ताल्लुक ऊना के बनगढ़ शाही परिवार से था, उनके परदादा वहां के राजा थे। महज 10 दिन पहले ही उत्तराखंड की युवती से उनकी शादी हुई थी। घर में नई बहू के आगमन का जश्न मनाया जा रहा था और खुशियां बांटी जा रही थीं, लेकिन सोहाना में कबड्डी मैच के दौरान दो बदमाशों ने सैल्फी लेने के बहाने पास आकर राणा पर गोलियां बरसा दीं, जिससे उनकी मौत हो गई।
समाज को झकझोर देने वाली घटना
एक तरफ नई नवेली दुल्हन का सुहाग उजड़ गया और माता-पिता का सहारा छिन गया, वहीं दूसरी ओर इस तरह की लूट ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों का कहना है कि सामान की कीमत से ज्यादा उनके लिए उसकी भावनात्मक अहमियत है। अब देखना यह है कि पुलिस कब तक इस बेईमान शख्स को सलाखों के पीछे पहुंचा पाती है।








