वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

हिमाचल: गुड़िया केस से जुड़े मामले में बड़ा फैसला, पूर्व IG जहूर जैदी की उम्रकैद सस्पैंड, CBI को झटका

हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित कोटखाई (गुड़िया) प्रकरण से जुड़े सूरज कस्टोडियल डेथ केस में एक नया मोड़ आया है। मामले में दोषी करार दिए गए हिमाचल प्रदेश के पूर्व आईजी जहूर हैदर जैदी को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ की सीबीआई कोर्ट द्वारा जैदी को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया है।

क्या था निचली अदालत का फैसला

इसी साल 27 जनवरी को चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई कोर्ट ने पूर्व आईजी जहूर हैदर जैदी समेत 8 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोषियों में जैदी के अलावा तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी, एसआई राजिंद्र सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, हेड कांस्टेबल मोहन लाल, सूरत सिंह, रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रंजीत सटेटा शामिल थे। हालांकि, तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

8 साल पहले का है मामला

यह मामला जुलाई 2017 का है। शिमला के कोटखाई के दांदी जंगल में एक स्कूली छात्रा (गुड़िया) का शव मिला था, जिसकी रेप के बाद हत्या की गई थी। इस जघन्य अपराध को लेकर जनता में भारी आक्रोश था। तत्कालीन सरकार ने आईजी जैदी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया। एसआईटी ने सूरज नामक एक नेपाली श्रमिक सहित कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। 18 जुलाई 2017 की रात कोटखाई थाने में पुलिस रिमांड के दौरान सूरज की मौत हो गई। पुलिस ने दावा किया कि सूरज की मौत हवालात में बंद एक अन्य आरोपी राजू के साथ हुए झगड़े में हुई, लेकिन सच्चाई कुछ और ही थी।

ऐसे खुला राज और जांच के घेरे में आए आईजी जैदी

पुलिस अधिकारियों ने सूरज की मौत को कैदियों की आपसी लड़ाई बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। यहां तक कि सबूत मिटाने के लिए सूरज के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने का प्रयास भी किया गया। लेकिन सीबीआई ने हस्तक्षेप कर शव को कब्जे में लिया और दिल्ली एम्स से पोस्टमार्टम करवाया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सूरज की मौत अत्यधिक पिटाई से हुई थी। थाने में संतरी की ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल दिनेश इस पूरी घटना का चश्मदीद था। अधिकारियों ने उस पर झूठी गवाही देने और कोरे कागजों पर साइन करने का दबाव बनाया, लेकिन दिनेश ने मना कर दिया। आईजी जैदी ने दिनेश का बयान अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया था, जिसे उन्होंने जांच रिपोर्ट से गायब कर दिया। बाद में जब सीबीआई ने जैदी का फोन जब्त किया, तो उसमें दिनेश की रिकॉर्डिंग मिल गई। इसके अलावा, दिनेश के फोन में आईजी जैदी की वह कॉल भी रिकॉर्ड हो गई जिसमें वे उसे चुप रहने और मामला संभाल लेने की बात कह रहे थे।

सीबीआई की सुझबूझ से बचे सबूत

तत्कालीन एसपी सौम्या सांबशिवन और सीबीआई की तत्परता के कारण सूरज के शव का अंतिम संस्कार रोका गया। यदि शव जला दिया जाता, तो हत्या का यह मामला कभी साबित नहीं हो पाता। सीबीआई जांच में यह साफ हुआ कि पुलिस ने अपनी नाकामी छुपाने और केस को सॉल्व दिखाने की जल्दबाजी में एक निर्दोष की जान ले ली थी और फिर पूरे सिस्टम ने मिलकर इसे एक्सीडैंट का रूप देने की कोशिश की थी। फिलहाल, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद जहूर हैदर जैदी जेल से बाहर आ सकेंगे, जो सीबीआई के लिए एक झटका माना जा रहा है।

Desk
Author: Desk

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें
error: Content is protected !!