नए साल की पहली सुबह… जब दुनिया उम्मीदों का सूरज देख रही थी, तब कुल्लू के अस्पताल के बाहर का मंजर दिल दहला देने वाला था। सोचिए, एक मां-बाप के लिए इससे बड़ा वज्रपात क्या होगा कि जिस दिन वो अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य की कामना कर रहे हों, उसी दिन उन्हें अपने जिगर के टुकड़ों की लाशें लेनी पड़ें। जिस नए साल का स्वागत हंसी-खुशी और प्रसाद बांटकर होना था, उसने इन परिवारों को ऐसा जख्म दिया है जो ताउम्र रिसता रहेगा।
वीरवार की सुबह कुल्लू अस्पताल के बाहर सिर्फ चीखें और सिसकियां थीं। यहां सतपाल (25), अंकिता (20) और कशिश (20) के माता-पिता नए साल के पहले दिन अपने बच्चों को गले लगाने की बजाय उनकी बेजान देह का इंतजार कर रहे थे। वहीं, चौथी दोस्त रतांजलि (20) ने एम्स बिलासपुर में जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए दम तोड़ दिया।
ये चारों दोस्त जिंदगी से लबरेज थे। नए साल और सतपाल के 25वें जन्मदिन का जश्न मनाने चाराें घर से निकले थे। जब खुशियां मनाकर ये घर लौट रहे थे ताे रास्ते में ‘काल’ उनका इंतजार कर रहा था। भुतनाथ पुल के पास अचानक उनकी कार अनियंत्रित हाेकर पहले पैरापिट से टकराई और फिर सड़क किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। सतपाल, अंकिता और कशिश की मौके पर ही सांसें थम गईं, जबकि रतांजलि ने अस्पताल में आखिरी सांस ली।
जरा सोचिए उस मंजर के बारे में… कहां इन बच्चों के सामने आने वाले कई साल थे और कहां अब सिर्फ कफन है। 25 साल का ‘बर्थडे बॉय’ सतपाल अब कभी अपना अगला जन्मदिन नहीं मना पाएगा। 20-20 साल की वो बच्चियां, जिनके सपने अभी उड़ान भरने वाले थे, वो हमेशा के लिए खामोश हो गईं। आने वाला हर नया साल अब इनके परिवारों के लिए जश्न नहीं, बल्कि उस भयानक दिन की याद लेकर आएगा जिसने उनकी गोद सूनी कर दी। खैर ईश्वर इन दिवंगत आत्माओं को शांति दे और पीछे छूट गए इन बिलखते परिवारों को यह पहाड़ जैसा दुख सहने की शक्ति दे।








