कहते हैं वक्त और किस्मत पर किसी का जोर नहीं चलता, लेकिन हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में वक्त ने जो सितम ढाया है, उसने हर आंख को नम कर दिया है। नूरपुर के सुलियाली गांव में जिस घर में 18 दिन बाद शहनाइयां गूंजनी थीं, वहां आज चीख-पुकार मची है। जिस आंगन से बेटे की बारात निकलनी थी, आज उसी आंगन से दूल्हे के पिता की अर्थी उठी।
बेटे की शादी की चल रही थीं तैयारियां
बीएसएफ में एएसआई के पद पर तैनात 56 वर्षीय कुलदीप धीमान के घर में उनके बेटे शुभम की शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। घर में नया पेंट हो चुका था और मेहमानों को न्याैता भी दिया जा चुका था। पिता कुलदीप खुद शादी की तैयारियों को लेकर उत्साहित थे। 10 फरवरी को बेटे की शादी थी, जिसके लिए वह दिल्ली से ट्रेन पकड़कर घर आने वाले थे, लेकिन विधि का विधान देखिए…वह घर तो पहुंचे, लेकिन पैदल चलकर नहीं, बल्कि तिरंगे में लिपटकर।
बाड़मेर में ड्यूटी के दौरान आया हार्ट अटैक
कुलदीप धीमान राजस्थान के बाड़मेर में सरहद की रक्षा में तैनात थे। जानकारी के मुताबिक, घर आने की तैयारी के बीच ड्यूटी के दौरान ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उन्हें बचाने के लिए अस्पताल भी ले जाया गया, लेकिन इस जांबाज ने वहीं अंतिम सांस ली। जिस पिता को बेटे की शादी की जिम्मेदारियां उठानी थीं, वो दुनिया छोड़ गया।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
जैसे ही कुलदीप धीमान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव सुलियाली पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी और बेटे का विलाप देखकर हर किसी का कलेजा फट गया। जिस घर में बहू के स्वागत की तैयारी थी, वहां मातम पसर गया। बीएसएफ के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में शहीद कुलदीप धीमान को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। हवा में गोलियां दागकर और शस्त्र उल्टे कर उन्हें सलामी दी गई। बेटे शुभम ने नम आंखों से पिता की चिता को मुखाग्नि दी।








