हिमाचल प्रदेश की शांत वादियों में इन दिनों धमकी भरी ई-मेल ने प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। प्रदेश उच्च न्यायालय और मंडी-धर्मशाला के उपायुक्त कार्यालयों के बाद, अब उपमंडल बिलासपुर का उपायुक्त कार्यालय शरारती तत्वों के निशाने पर आया है। बम से उड़ाने की इस धमकी के बाद पूरे जिले में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जैसे ही प्रशासन को धमकी भरी ई-मेल मिलने की सूचना मिली, पुलिस महकमे में खलबली मच गई। पलक झपकते ही पूरा परिसर छावनी में तब्दील हो गया। मौके पर बम निरोधक दस्ता (बम स्क्वायड) और डॉग स्क्वायड को बुलाया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने दफ्तर के एक-एक कोने, फाइलों के ढेर और अलमारियों की सघन तलाशी ली। हालांकि, घंटों चली इस मशक्कत के बाद जब कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला, तब जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली। किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए परिसर के बाहर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी तैनात कर दी गई थीं।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात ईमेल की भाषा और उसका तरीका है। जानकारी के अनुसार, यह मेल रूसी और यूक्रेनी भाषा में लिखा गया था। इतना ही नहीं, यह मेल सिर्फ डीसी दफ्तर को ही नहीं, बल्कि एक साथ करीब 50 लोगों और सरकारी विभागों को भेजा गया था। किसी अज्ञात ‘एक्स, वाई आईडी’ से भेजी गई इस मेल ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। आखिर विदेशी भाषाओं का इस्तेमाल करने के पीछे क्या मंशा है? क्या यह किसी बड़े नेटवर्क की शरारत है या महज दहशत फैलाने की कोशिश? साइबर एक्सपर्ट्स अब इसी गुत्थी को सुलझाने में जुटे हैं।
मामले की गंभीरता पर बात करते हुए एडीसी बिलासपुर, ओमकांत ठाकुर ने बताया कि जैसे ही मेल प्राप्त हुआ, तुरंत पुलिस को सूचित किया गया और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया। वहीं, एसपी बिलासपुर संदीप धवल ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि हमने एहतियात के तौर पर पूरे परिसर की गहन तलाशी ली है, फिलहाल डरने की कोई बात नहीं है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन हम ढील नहीं बरत रहे। साइबर सेल की मदद से मेल के स्रोत का पता लगाया जा रहा है।
फिलहाल, बिलासपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बार-बार मिल रही इन धमकियों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि हिमाचल के प्रशासनिक केंद्रों को डिजिटल माध्यम से डराने की कोशिश करने वाले ये चेहरे आखिर कौन हैं? पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां जल्द ही इस डिजिटल दहशत के पीछे छिपे असली गुनहगारों तक पहुँचने का दावा कर रही हैं।








