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हमीरपुर: खुशियों वाले घर पर टूटा दुखाें का पहाड़, 9 फरवरी को थी शादी…घाेड़ी चढ़ने से पहले उठी बेटे की अर्थी

किसे पता था कि जिस घर में 9 फरवरी को शहनाई गूंजनी थी, वहां वक्त से पहले मातम की चीखें गूंज उठेंगी। नियति ने हमीरपुर के एक परिवार के साथ ऐसा क्रूर मजाक किया है, जिसे सुनकर हर किसी का दिल पसीज गया है। नेरी गांव के 30 वर्षीय विशाल, जिसके सिर पर कुछ दिनों बाद सेहरा सजना था, वाे कफन ओढ़ कर हमेशा के लिए गहरी नींद में साे गया। एक हंसता-खेलता परिवार पल भर में बिखर गया।

पंजाब में बैठा था काल, बचने का मौका तक नहीं मिला

शादी के खर्च और भविष्य के सपनों को संजोने के लिए विशाल कुछ वक्त पहले ही पंजाब के खरड़ में नौकरी करने गया था। सोमवार की सुबह वह अपनी ड्यूटी के लिए निकला, लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि वह अपने सफर पर नहीं, बल्कि आखिरी सफर पर निकला है। हादसा इतना भयावह था कि सुनने वालों की रूह कांप जाए। बताया जा रहा है कि विशाल जब बाइक पर जा रहा था, तो पीछे से एक तेज रफ्तार गाड़ी ने उसे जोरदार टक्कर मारी। टक्कर लगते ही वह हवा में उछला, लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि सामने से आ रहे टिप्पर ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। यमराज ने जैसे आगे और पीछे दोनों तरफ से घेराबंदी कर रखी थी। विशाल को संभलने का एक मौका भी नहीं मिला और मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं।

शादी के कार्ड बंट चुके थे, घर में थी जश्न की तैयारी

नेरी गांव स्थित विशाल के घर में शादी की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। 9 फरवरी को बारात निकलनी थी। घर में खुशी का माहौल था, डीजे और नाच-गाने की योजनाएं बन रही थीं। चमचमाता सेहरा और शादी का सामान खरीदकर रख लिया गया था, लेकिन एक खबर ने सारी खुशियों को नजर लगा दी। विशाल के चाचा रुंधे गले से बताते हैं कि वो चार महीने पहले ही काम पर गया था। हमने कार्ड बांट दिए थे, रिश्तेदार आने वाले थे। हमें क्या पता था कि बेटा अब कभी नहीं लौटेगा।

दुल्हन के सपने और मां-बाप का बुढ़ापा, सब उजड़ गया

जरा सोचिए उस दुल्हन के बारे में, जिसने अभी गृहस्थी के सपने संजोए थे। जिसकी दुनिया बसने से पहले ही उजड़ गई। जिस आवाज से उसकी सुबह होनी थी, वह हमेशा के लिए खामोश हो गई। वहीं, विशाल के माता-पिता का हाल देखकर पत्थर भी पिघल जाए। मां बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही है। जिस बेटे को दूल्हा बनाना था, आज उसके इस तरह दुनिया से चले जाने का दर्द पाकर परिवार बेसुध है।

इंसानियत को झकझोरता सवाल

गलती शायद सड़क पर चल रहे किसी और वाहन की रही होगी, लेकिन उसकी सजा पूरे परिवार को भुगतनी पड़ी। यह हादसा सिर्फ एक जान का जाना नहीं है, बल्कि दो परिवारों की खुशियों की हत्या है। यह हादसा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि जीवन कितना क्षणभंगुर है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे और इस वज्रपात को सहने की शक्ति शोकाकुल परिवार को प्रदान करे।

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Author: Desk

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