हिमाचल प्रदेश के युवाओं में देश सेवा का जज्बा हमेशा से ही देखने को मिलता है। इसी कड़ी में सोलन जिले के नालागढ़ उपमंडल के गांव निचला नंगल के होनहार बेटे महेश्वर सिंह ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। महेश्वर सिंह ने प्रतिष्ठित यूपीएससी (UPSC) परीक्षा पास कर भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) में असिस्टैंट कमांडैंट का पद हासिल किया है।
गाजे-बाजे के साथ हुआ हीरो का स्वागत
अपनी एक वर्ष की कठिन और अनुशासनात्मक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सोमवार को जब महेश्वर सिंह पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचे, तो वहां का माहौल उत्सव जैसा हो गया। ग्रामीणों और परिजनों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर फूल-मालाएं पहनाकर उनका ऐतिहासिक अभिनंदन किया। गांव के बेटे को अधिकारी के रूप में देखकर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। पूरा गांव भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।
आसान नहीं था अधिकारी बनने का सफर
महेश्वर सिंह की सफलता का सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नालागढ़ के ही एक निजी स्कूल से पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे शिमला चले गए। बाद में उन्होंने सोलन स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (नौनी यूनिवर्सिटी) से स्नातक की डिग्री हासिल की। सिविल सर्विसेज की तैयारी के दौरान महेश्वर ने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उनका लक्ष्य स्पष्ट था। अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर बीएसएफ में सीधे राजपत्रित अधिकारी का पद प्राप्त किया।
पिता ने रखी थी महेश्वर की सफलता की नींव
महेश्वर की इस सफलता की नींव उनके पिता प्रकाश चंद ने रखी थी। प्रकाश चंद वर्तमान में हिमाचल पुलिस में शिमला में इंस्पैक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिता ने महेश्वर को बचपन से ही एक मंत्र दिया था कि शिक्षा ही वह चाबी है, जिससे सफलता के सबसे बड़े द्वार खुलते हैं। बेटे की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हुए प्रकाश चंद ने समाज के अन्य अभिभावकों से भी एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि मैं सभी माता-पिता से अनुरोध करता हूं कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें। एक शिक्षित संतान ही न केवल परिवार का, बल्कि देश का असली भविष्य संवार सकती है।
पूरा परिवार है काबिलियत की मिसाल
महेश्वर सिंह का परिवार क्षेत्र में शिक्षा और संस्कार की मिसाल है। महेश्वर ही नहीं, बल्कि उनकी बहनें भी अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य कर रही हैं। महेश्वर की बड़ी बहन हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में वकील हैं। दूसरी बहन पीजीआई चंडीगढ़ में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में मानवता की सेवा कर रही हैं। वहीं मां रेशमा देवी ने भावुक होते हुए कहा कि उनके तीनों बच्चों ने अपनी लगन और मेहनत से उनके और उनके पति के सपनों को साकार कर दिखाया है। महेश्वर सिंह की यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और इरादे पक्के तो सफलता अवश्य कदम चूमती है।








