हिमाचल प्रदेश की औद्योगिक नगरी बद्दी में भ्रष्टाचार के दीमक ने एक बार फिर सिर उठाया है, लेकिन इस बार भी विजिलैंस की पैनी नजर से अपराधी बच नहीं पाया। पेड़ कटान की फाइल बंद करने का सौदा एक वन रक्षक को भारी पड़ गया। विजिलैंस थाना बद्दी की टीम ने जाल बिछाकर नालागढ़ वन विभाग के दभोटा बीट में तैनात वन रक्षक को 5000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।
मामला तब शुरू हुआ जब एक व्यक्ति ने विजिलैंस का दरवाजा खटखटाया। आरोप है कि वन रक्षक ने पेड़ कटान के एक मामले को रफा-दफा करने के लिए रिश्वत की मांग की, लेकिन जागरूक शिकायतकर्ता ने घुटने टेकने के बजाय विजिलैंस को सूचना देना बेहतर समझा। सूचना मिलते ही डीएसपी विजिलैंस डॉ. प्रतिभा चौहान ने कमान संभाली और एक टीम गठित की। विजिलैंस ने एक फुलप्रूफ प्लान बनाया। जैसे ही आरोपी वन रक्षक ने शिकायतकर्ता से नोटों की गड्डी (5000 रुपए) हाथ में ली, पहले से घात लगाकर बैठी विजिलैंस टीम ने फुर्ती से उसे मौके पर ही दबोच लिया।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी से रिश्वत की राशि बरामद कर ली गई। विजिलैंस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं के तहत मुकद्दमा दर्ज कर लिया है। आराेपी काे बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा। यहीं नहीं, विजिलैंस अब आरोपी की पुरानी फाइलों को भी खंगालने की तैयारी में है। जांच अधिकारी अदालत से रिमांड मांगेंगे ताकि यह पता चल सके कि क्या इस खेल में कोई और भी शामिल है या यह वन रक्षक अकेले ही अपनी जेब भर रहा था।
यह घटना वन विभाग के दामन पर लगा पहला दाग नहीं है। विजिलैंस की डायरी बताती है कि विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। अभी हाल ही में दिसंबर 2025 में इसी विभाग के एक अन्य वन रक्षक को 50,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए विजिलैंस टीम बद्दी ने गिरफ्तार किया था। चंद महीनों के भीतर यह दूसरा मामला सामने आने से विभाग की साख पर बट्टा लग गया है। स्थानीय जनता अब सवाल पूछ रही है कि क्या वन विभाग में बिना चढ़ावे के कोई पत्ता नहीं हिलता?
इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों ने डीएसपी डॉ. प्रतिभा चौहान और उनकी टीम की इस धाकड़ कार्रवाई की सराहना की है, साथ ही मांग की है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी वर्दी की आड़ में जनता को लूटने की हिम्मत न करे।








