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कांगड़ा: मुराद पूरी हुई तो परिवार सहित मां ज्वालामुखी के दरबार पहुंचा श्रद्धालु, अर्पित किया चांदी का छत्र

देवभूमि हिमाचल प्रदेश में स्थित शक्तिपीठ और माता के दरबार केवल पूजा-पाठ के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये लाखों भक्तों के अटूट भरोसे, विश्वास और उम्मीदों का अंतिम ठिकाना माने जाते हैं। यहां लोग अपनी हर चिंता और पीड़ा माता के चरणों में सौंप देते हैं। देवभूमि की यह प्राचीन परंपरा रही है कि जब भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, तो वे किसी दिखावे या शोर-शराबे से दूर रहकर, अत्यंत शांति और गुप्त रूप से अपना आभार व्यक्त करते हैं। आस्था और समर्पण की इस पवित्र परंपरा को जीवंत करने वाला ऐसा ही एक भावुक दृश्य विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में देखने को मिला।

जानकारी के अनुसार, पंजाब से आए एक श्रद्धालु ने माता ज्वालामुखी के दरबार में हाजिरी लगाई और माता रानी के चरणों में लगभग 880 ग्राम का एक बेहद खूबसूरत और नक्काशीदार चांदी का छत्र अर्पित किया। आज के दौर में जहां छोटे से दान के बाद भी लोग सोशल मीडिया और होर्डिंग्स पर प्रचार करते हैं, वहीं इस श्रद्धालु की भेंट न तो किसी सार्वजनिक घोषणा के साथ आई और न ही इसमें नाम कमाने की कोई लालसा थी। भक्त ने मंदिर प्रशासन और पुजारियों से विनम्र आग्रह किया कि उसकी और उसके परिवार की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाए।

पहचान गुप्त रखने की शर्त पर श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले माता ज्वाला के दरबार में आकर एक मन्नत मांगी थी। माता रानी की कृपा से उनकी वह मुराद पूरी हो गई। इसी असीम कृपा का धन्यवाद करने के लिए वह आज अपने पूरे परिवार के साथ ज्वाला मां के दरबार में पहुंचे थे। चांदी का छत्र अर्पित करते समय श्रद्धालु और उनके परिजनों की आंखें नम थीं और चेहरे पर माता के प्रति असीम कृतज्ञता का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह भेंट किसी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थी, बल्कि भक्त की आत्मा का सच्चा समर्पण था। पुजारी ने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न करवाई। इसके पश्चात भक्त ने वह चांदी का छत्र अपने हाथों से माता के श्री चरणों में समर्पित कर दिया। पुजारी के मुताबिक, श्रद्धालु ने केवल इतना कहा कि माता ने मेरे सिर से चिंताओं का बोझ हटा दिया है, यह छत्र उसी का एक छोटा-सा धन्यवाद है।

बता दें कि कांगड़ा जिले में स्थित श्री ज्वालामुखी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती की जीभ गिरी थी। यहां सदियों से बिना तेल-बाती के प्राकृतिक ज्वालाएं प्रज्वलित हो रही हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार जो भी भक्त सच्चे मन से माता ज्वाला के दरबार में आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता।

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Author: Desk

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