वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

हिमाचल: “बस थोड़ी देर में आती हूं…” कहकर घर से निकली थी महिला, फिर हो गया ये भयानक हादसा

कहते हैं कि मौत कब, कहां और किस रूप में सामने आ जाए, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां घास काटने के लिए घर से निकली एक महिला की ढांक (खाई) से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। जो परिवार उसे बचाने की उम्मीद में चंडीगढ़ की तरफ भागा था, उन्हें बीच रास्ते से ही अपनी बेटी का शव लेकर लौटना पड़ा।

“मैं घास लेेने जा रही हूं…बस थोड़ी देर में आती हूं…” घर से निकलते वक्त मंडी के नगवांईं स्थित तनारू गांव की रहने वाली रीना देवी ने अपने परिवार से बस यही कहा था। सोमवार दोपहर करीब तीन बजे का वक्त था। रीना रोजमर्रा की तरह अपने घर के पास ही स्थित घासनी की तरफ गई थीं। जगह जानी-पहचानी थी और काम भी रोज का था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि वहां काल उनका इंतजार कर रहा है। घास काटने के दौरान अचानक रीना का पैर फिसला और वह सीधे ढांक से नीचे जा गिरीं।

ढांक से गिरने के कारण रीना के सिर पर गहरी और गंभीर चोट आई। जब वह काफी देर तक लौटकर घर नहीं आईं, तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। रीना को लहूलुहान हालत में देख परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना एक भी पल गंवाए, परिवार वाले उन्हें तुरंत कुल्लू अस्पताल लेकर भागे। रीना की गंभीर हालत को देखते हुए कुल्लू के डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। परिवार एक उम्मीद के साथ चंडीगढ़ की तरफ निकला था कि शायद उनकी रीना बच जाएगी… लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। पीजीआई पहुंचने से पहले ही, रास्ते में रीना की सांसों ने उनका साथ छोड़ दिया।

जिस एम्बुलेंस में परिवार रीना की जान बचाने की आस लेकर जा रहा था, उसी एम्बुलेंस में उन्हें रीना का शव लेकर वापस गांव लौटना पड़ा। छोटी सी उम्र में परिवार के एक नौजवान सदस्य के यूं चले जाने से पूरे तनारू गांव में मातम पसरा हुआ है। अब परिवार सिर्फ यही सोच रहा है कि काश वो मनहूस घड़ी ना आती, काश रीना उस दिन घास काटने ना जाती… लेकिन मौत के आगे ये काश वाले सारे सवाल बेमानी हैं। एक पैर फिसलने से पूरा का पूरा परिवार तबाह हो गया है। The Point Himachal रीना देवी की आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना करता है।

पहाड़ों पर जिंदगी जितनी खूबसूरत है, उतनी ही कठिन और जोखिम भरी भी। घास काटने और रोजमर्रा के काम के दौरान ऐसे हादसे पहाड़ के लोगों की एक कड़वी और दर्दनाक सच्चाई है। हम आपसे अपील करते हैं कि ऐसे रास्तों पर काम करते वक्त विशेष सावधानी बरतें।

Desk
Author: Desk

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें
error: Content is protected !!