वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

हिमाचल: तिरंगे में लिपटा घर आया बेटा तो फूट-फूट कर रोई मां, बेसुध हुई पत्नी…2 मासूमाें ने खाेया पिता, ITBP जवान की अंतिम विदाई देख हर आंख हुई नम

कहते हैं सैनिक जब घर लौटता है तो खुशियां आती हैं, लेकिन जब वह तिरंगे में लिपटकर आता है तो पूरा आसमान रो पड़ता है। हमीरपुर के नाडियाना रगड़िया (झनियारा) गांव में शनिवार का दिन कुछ ऐसा ही गमगीन रहा। महज 34 वर्ष की आयु में आईटीबीपी (ITBP) के कांस्टेबल रमन सिंह के आकस्मिक निधन ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि दो नन्हे मासूमों से उनके पिता का साया भी हमेशा के लिए छीन लिया।

तिरंगे में लिपटे बेटे काे देख फट गया मां का कलेजा

शनिवार को जब रमन सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप उठी। घर के आंगन में जब तिरंगे में लिपटा हुआ बेटा पहुंचा, तो मां सुनीता देवी का कलेजा फट गया। जिस बेटे की सलामती की दुआएं वह रोज मांगती थीं, उसे इस हाल में देख वह फूट-फूट कर रोने लगीं। वहीं, जीवनसंगिनी तमन्ना ठाकुर पति के वियोग में बेसुध हो गईं। परिजनों के क्रंदन ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर दिया।

मासूमों को देख पसीजा हर दिल

इस दुखद घड़ी में सबसे ह्रदय विदारक दृश्य रमन सिंह के दो नन्हे जुड़वां बेटों का था। उन मासूमों को शायद अभी यह अहसास भी नहीं है कि उनके सिर पर रखा पिता का मजबूत हाथ अब हमेशा के लिए उठ चुका है। पिता के प्यार से वंचित इन बच्चों को देखकर वहां मौजूद कठोर से कठोर दिल वाला व्यक्ति भी अपने आंसू नहीं रोक पाया।

ड्यूटी के दौरान आया था हार्ट अटैक

कांस्टेबल रमन सिंह सराहन (रामपुर) में अपनी सेवाएं दे रहे थे। 18 दिसंबर की शाम करीब सवा सात बजे, जब वह पूरी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी पर तैनात थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। साथियों ने उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता दी और बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों के अनुसार हृदयाघात (हार्ट अटैक) ने इस जांबाज की सांसें छीन लीं।

राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन

देश सेवा में अपने प्राण त्यागने वाले रमन सिंह को उनके गांव और विभाग ने पूरे सम्मान के साथ विदाई दी। आईटीबीपी की टुकड़ी ने अपने साथी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर अंतिम सलामी दी। पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष राकेश ठाकुर, पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने नम आंखों से अपने लाडले को विदा किया। अंत में, चचेरे भाई ने रमन सिंह की पार्थिव देह को मुखाग्नि दी और एक जांबाज सिपाही पंचतत्व में विलीन हो गया। रमन सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन देश सेवा के प्रति उनका समर्पण और कर्तव्य के दौरान दी गई उनकी शहादत हमेशा याद रखी जाएगी।

Desk
Author: Desk

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें
error: Content is protected !!