क्या कोई सोच सकता है कि चंडीगढ़ के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सैक्टर-11 में दिनदहाड़े गोलियों की बारिश हो जाएगी? शनिवार की दोपहर यहां एक ऐसी खौफनाक वारदात हुई जिसने न सिर्फ सिटी ब्यूटीफुल बल्कि हिमाचल प्रदेश तक को दहला कर रख दिया है।
सैक्टर-11 के मशहूर कुमार मेडिकल स्टोर में जो हुआ, वह किसी हॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं था। दो नकाबपोश मौत के सौदागर ग्राहक बनकर दुकान में घुसे और काउंटर पर खड़े कैशियर जानकी दास (45) को ऑटोमैटिक गन से छलनी कर दिया। बदमाशों ने महज एक सैकेंड में 13 गोलियां जानकी दास के जिस्म में उतार दीं।
इस हत्याकांड ने हिमाचल के रोहड़ू में मातम पसरा दिया है। जानकी दास अपनी मेहनत की कमाई से परिवार पालने चंडीगढ़ (धनास) आए थे। हाल ही में उनके घर में जश्न का माहौल था क्योंकि उनकी पत्नी ने रोहड़ू में पंचायत चुनाव जीतकर प्रधान का पद हासिल किया था, लेकिन किसे पता था कि जीत की खुशियां चंद दिनों में ही मातम में बदल जाएंगी।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जानकी दास का किसी से कोई विवाद नहीं था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई गैंग की नजर मेडिकल स्टोर के मालिकों पर थी। मालिकों से रंगदारी मांगी जा रही थी, लेकिन दहशत फैलाने के लिए इस गैंग ने बलि चढ़ा दी एक बेगुनाह कर्मचारी की।
एसपी सुमेर प्रताप सिंह खुद मौके पर पहुंचे हैं, लेकिन सवाल यह है कि वीवीआईपी इलाके में ऑटोमैटिक हथियारों के साथ बदमाश कैसे घुसे और कैसे फरार हो गए? पीजीआई में जानकी दास ने दम तोड़ दिया है, लेकिन यह हत्याकांड पुलिस और सिस्टम से पूछ रहा है कि रंगदारी के इस खूनी खेल में आखिर कब तक बेगुनाह अपनी जान गंवाते रहेंगे?








