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हिमाचल में पंजाब के तस्कर की बड़ी साजिश नाकाम, कार के स्टीयरिंग कवर से बरामद हुआ ₹15 लाख का ‘सफेद जहर’

नशा तस्कर पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए कितने शातिर तरीके अपना रहे हैं, इसका एक हैरान करने वाला मामला हिमाचल प्रदेश के नूरपुर से सामने आया है। पुलिस जिला नूरपुर के सीआईए स्टाफ ने एक ऐसे अंतर्राज्यीय नशा तस्कर को दबोचा है, जो तीन राज्यों में अपनी पैठ बना चुका था। पुलिस ने इस तस्कर की कार से 15 लाख रुपए से अधिक कीमत का 264.6 ग्राम चिट्टा बरामद कर हिमाचल के युवाओं तक पहुंचने वाले मौत के सामान की एक बहुत बड़ी खेप को रोक दिया है।

तस्कर की चालाकी इतनी थी कि कोई आम इंसान वहां तक सोच भी नहीं सकता। एसपी नूरपुर कुलभूषण वर्मा ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर सीआईए स्टाफ ने उलेहड़ियां-मीलवां मार्ग पर रेलवे फाटक के पास नाकाबंदी की थी। तभी वहां से गुजर रही एक सफेद रंग की होंडा अमेज कार को चेकिंग के लिए रोका गया। शुरुआती तलाशी में कार में कुछ नहीं मिला, लेकिन पुलिस की पारखी नजरों से तस्कर का झूठ छिप नहीं सका। जब पुलिस ने कार की बारीकी से जांच की, तो पता चला कि हेरोइन का पैकेट कार के स्टीयरिंग काउल कवर (स्टीयरिंग के नीचे का हिस्सा) के अंदर बड़ी ही होशियारी से फिट किया गया था। ड्रग डिटेक्शन किट से जांच करने पर इसकी पुष्टि चिट्टे के रूप में हुई। कमर्शियल मात्रा (264.6 ग्राम) होने के कारण तुरंत एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार को जब्त कर लिया गया।

गिरफ्तार किए गए तस्कर की पहचान 41 वर्षीय जितेंद्र सिंह (निवासी भर्टवाल, तहसील बटाला, जिला गुरदासपुर, पंजाब) के रूप में हुई है। पुलिस जांच में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ है, वह यह है कि जितेंद्र कोई छोटा-मोटा सप्लायर नहीं है। वह एक शातिर क्रिमिनल है, जिसका नेटवर्क पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर और हिमाचल तक फैला है। आरोपी के खिलाफ पहले से ही इन तीनों राज्यों में एनडीपीएस एक्ट के तहत तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।

इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद नूरपुर पुलिस अब बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज खंगालने में जुट गई है। पुलिस आरोपी जितेंद्र से कड़ाई से पूछताछ कर रही है कि 15 लाख रुपए की यह बड़ी खेप पंजाब से किसने भेजी थी और हिमाचल प्रदेश में इसे किन लोकल पैडलर्स तक पहुंचाया जाना था। माना जा रहा है कि जितेंद्र के मोबाइल फोन और पूछताछ के बाद हिमाचल में सक्रिय कई सफेदपोश नशा तस्करों के चेहरों से नकाब उठ सकता है। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि तस्कर चाहे जितने भी हाईटेक तरीके अपना लें, हिमाचल पुलिस के रडार से बचना अब उनके लिए नामुमकिन है।

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Author: Desk

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