हिमाचल प्रदेश के गांवों में ग्राम पंचायत के प्रधान और चुने हुए प्रतिनिधियों का 5 साल का कार्यकाल आधिकारिक तौर पर पूरा हो गया। पिछले कुछ दिनों से गांव की चौपालों और आम लोगों के मन में यही सवाल था कि कल से हमारे जरूरी कागजी काम और विकास कार्य कौन देखेगा? लेकिन अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार ने जनता की इस दुविधा को दूर करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि 1 फरवरी से गांवों में कामकाज नहीं रुकेगा। इसके लिए सरकार ने एक वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी है। इसकी अधिसूचना पंचायती राज विभाग की तरफ से जारी कर दी गई है।
पंचायत में अब बीडीओ और पंचायत सचिव सुनेंगे आपकी फरियाद
सबसे पहले बात करते हैं आम आदमी से सीधे जुड़ी ग्राम पंचायत की। 1 फरवरी से प्रधान जी के पास मौजूद सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां (फैसले लेने और चेक साइन करने की पावर) अब सरकारी अधिकारियों के पास आ गई हैं। सरकार ने यह अहम जिम्मा खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) और आपके पंचायत सचिव को सौंप दिया है। इसका मानवीय पहलू यह है कि अब आपको छोटे-मोटे कामों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। प्रधान का पद खाली होने के बावजूद पंचायत सचिव और बीडीओ के जरिए आपके विकास कार्यों की मंजूरी और भुगतान सुचारू रूप से चलते रहेंगे।
समिति और जिला परिषद में अफसरों की टीम संभालेगी मोर्चा
सिर्फ गांव ही नहीं, ब्लॉक और जिला स्तर पर भी कामकाज में कोई रुकावट नहीं आएगी। पंचायत समिति को चलाने के लिए एक विशेष कमेटी बना दी गई है। इस नई व्यवस्था में पंचायत समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब चेयरपर्सन की भूमिका निभाएंगे, जबकि सोशल एजुकेशन और ब्लॉक प्लानिंग ऑफिसर इस कमेटी के सदस्य के रूप में कार्य करेंगे। प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए पंचायत इंस्पैक्टर (या सब-इंस्पेक्टर) को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि सोशल एजुकेशन और ब्लॉक प्लानिंग ऑफिसर या इंस्पैक्टर का पद खाली है, तो खंड विकास अधिकारी द्वारा नामित अन्य अधिकारी यह जिम्मेदारी निभाएंगे। जिला परिषद के कामकाज के लिए भी तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जिला परिषद की शक्तियों का प्रयोग करने और कार्यभार संभालने के लिए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है। इनके सहयोग के लिए जिला विकास अधिकारी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा, जिला पंचायत अधिकारी इस कमेटी में सदस्य सचिव की महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये तीनों अधिकारी मिलकर जिला परिषद के सभी कार्यों और शक्तियों का निष्पादन करेंगे।
क्यों आई यह नौबत और कब तक रहेगी यह व्यवस्था
आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर चुनाव क्यों नहीं हुए? दरअसल, प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 लागू होने के कारण समय पर चुनाव करवाना संभव नहीं हो पाया। नियमों के मुताबिक, आज कार्यकाल पूरा होते ही पुरानी पंचायतें भंग मानी जाएंगी। सरकार का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि लोकतंत्र के इस उत्सव (चुनाव) के इंतजार में गांवों का विकास न ठिठके। जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते और आप अपनी पसंद के नए जनप्रतिनिधि नहीं चुन लेते, तब तक यही वैकल्पिक व्यवस्था लागू रहेगी।
इन इलाकों के लोग ध्यान दें
यह नया आदेश लगभग पूरे हिमाचल पर लागू होगा, लेकिन हमारे जनजातीय क्षेत्रों के निवासियों के लिए स्थिति थोड़ी अलग है। लाहौल-स्पीति जिले के केलांग और काजा उपमंडल, चम्बा जिले का पांगी उपमंडल और कुल्लू जिले की 4 विशिष्ट ग्राम पंचायतों को इस आदेश से बाहर रखा गया है। वहां की विशिष्ट स्थितियों को देखते हुए यह नई व्यवस्था लागू नहीं होगी।
बेझिझक करवाएं अपने काम
कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। लोगों को डर था कि परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र या मनरेगा के कार्यों में बाधा आएगी। लेकिन अब तस्वीर साफ है कि 1 फरवरी की सुबह से ही नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। पंचायती राज विभाग ने सभी अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं कि जनता को कोई परेशानी न हो, इसलिए अब आप बिना किसी संशय के अपने काम पंचायत सचिव या संबंधित अधिकारियों के माध्यम से करवा सकते हैं।








