हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अनुसूचित जाति के कल्याण और सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री ने एससी वर्ग के उत्थान के लिए कार्य करने वाली उत्कृष्ट पंचायतों की प्रोत्साहन राशि को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही प्रदेश की कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर थाने में एक अलग इन्वैस्टिगेशन विंग स्थापित करने के निर्देश दिए हैं ताकि जांच कार्य में तेजी आए और मुख्य पुलिसिंग प्रभावित न हो।
उत्कृष्ट पंचायतों के लिए नए मानक तय
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रोत्साहन राशि उन पंचायतों को दी जाएगी जो गांव में सामाजिक समरसता बनाए रखेंगी। इसके लिए मानक तय किए गए हैं, जिनमें एससी वर्ग के विरुद्ध अत्याचार न होना, एससी कंपोनेंट के बजट का पूरा इस्तेमाल, नशामुक्ति अभियान, पराली न जलाना और पेयजल समस्या का समाधान शामिल है। राज्य, जिला और उपमंडल स्तर पर इन पंचायतों को पुरस्कृत किया जाएगा।
60 दिनों में चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य
अनुसूचित जाति एवं नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए कि एससी-एसटी मामलों में 60 दिनों के भीतर न्यायालय में चार्जशीट पेश की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत भी 60 दिन की समयसीमा तय की गई है। इसके लिए अलग से जांच अधिकारियों की नियुक्ति करने की बात भी कही गई है ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके।
एससी वर्ग के विरुद्ध उत्पीड़न किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एससी वर्ग के विरुद्ध उत्पीड़न किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई झूठी शिकायत दर्ज करवाता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, उन्होंने आपसी समझौते वाले मामलों की गहन जांच के आदेश दिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि समझौता किसी दबाव या लालच में तो नहीं किया गया है।
आर्थिक सहायता और सामाजिक समरसता पर जोर
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान 796 अत्याचार पीड़ितों को 8.84 करोड़ रुपए की राहत राशि दी गई है। वहीं, ‘अंतर्जातीय विवाह शगुन योजना’ के तहत चालू वित्त वर्ष में 1265 लाभार्थियों को 31.62 करोड़ रुपए की सहायता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में भी सेमिनार और डिबेट के जरिए सामाजिक जागरूकता फैलाई जा रही है।
साल में 4 बार जिला सतर्कता निगरानी समिति की बैठकाें के निर्देश
प्रशासनिक चुस्ती के लिए मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे साल में कम से कम चार बार जिला सतर्कता निगरानी समिति की बैठकें कर एससी एक्ट की समीक्षा करें। इन बैठकों में समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को भी शामिल किया जाएगा। बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार और मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।








