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न पार्टी, न झंडा…बड़गांव में दिखा सिर्फ ‘लक्खा’ का जलवा, Video में देखें… नामांकन में उमड़े जनसैलाब ने उड़ाए दिग्गजों के होश

बिलासपुर: चुनाव में नामांकन के वक्त अक्सर बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों के साथ भी भीड़ जुटाना मुश्किल हो जाता है, लेकिन बिलासपुर जिले के बड़गांव जिला परिषद वार्ड से निर्दलीय उम्मीदवार एडवोकेट मनोज कुमार उर्फ लक्खा के समर्थन में ऐसा सैलाब उमड़ा कि हर कोई हैरान रह गया। 11 मई को झंडूत्ता तहसील कार्यालय में नामांकन के दौरान मनोज के समर्थन में उमड़े जनसैलाब ने राजनीतिक दलों और दिग्गज नेताओं को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। भारी भीड़ और समर्थकों के उत्साह को देखकर इलाके में चर्चा है कि लक्खा ने नामांकन के दिन ही चुनाव को एकतरफा कर दिया है।

दिवंगत पिता की तस्वीर को किया नमन, महादेव की पूजा कर घर से निकले
नामांकन भरने से पहले मनोज कुमार ने अपने दिवंगत पिता की तस्वीर को नमन किया। इसके उपरांत सनातनी परंपरा के अनुसार महादेव की पूजा-अर्चना की और अपने पिता तुल्य चाचा का आशीर्वाद लेकर घर से निकले। जब वे झंडूत्ता तहसील कार्यालय की ओर बढ़े, तो उनके साथ गाड़ियों का लंबा काफिला और समर्थकों की भारी भीड़ थी। ढोल-नगाड़ों की थाप और फूलों के हारों से लदे मनोज कुमार का लोगों ने जोरदार स्वागत किया। खास बात यह रही कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भाजपा और कांग्रेस से जुड़े कई लोग भी उनके समर्थन में नजर आए।

नेता नहीं बेटे की छवि, कानून के हैं जानकार
बरठीं बाजार में एक छोटी-सी दुकान चलाने वाले मनोज कुमार की इलाके में ‘नेता नहीं बल्कि बेटे’ की छवि है। वे हर वर्ग बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवाओं के परिचित हैं और उनके सुख-दुख में शामिल होते हैं। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो मनोज बी.ए. एलएलबी पास एक एडवोकेट हैं। उनका मानना है कि कानून का ज्ञान होने के कारण प्रशासनिक कार्यों में उन्हें कोई गुमराह नहीं कर सकता। वे बड़गांव वार्ड की दशा और दिशा बदलने के एक स्पष्ट विजन के साथ मैदान में उतरे हैं। मनोज लक्खा का मानना है कि पार्टी के चुनाव चिह्न से ज्यादा यह मायने रखता है कि उम्मीदवार जनता के साथ कितना जमीनी स्तर पर जुड़ा है। नामांकन के दौरान उमड़ी भीड़ इसी जमीनी जुड़ाव का प्रमाण मानी जा रही है।

समाज सेवा में रहा है अग्रणी योगदान
मनोज राजनीति में आने से पहले से ही एक सक्रिय समाजसेवी रहे हैं। कोरोना महामारी के खौफनाक दौर में जब लोग घरों में कैद थे, तब मनोज ने अपनी जान की परवाह किए बिना निस्वार्थ सेवा की। कोरोना मरीजों के घर राशन पहुंचाना, अस्पतालों को सैनिटाइज करना, यहां तक कि संक्रमण न फैले इसके लिए मरीजों के टॉयलेट तक साफ करने जैसे कार्य उन्होंने किए। इसके अलावा कोरोना से जान गंवाने वालों का अंतिम संस्कार, गौ सेवा, रक्तदान शिविरों का आयोजन और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन भी उनकी प्राथमिकताओं में रहा है।

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Author: Desk

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