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सोलन: पथरी के ऑप्रेशन में गई महिला की जान, परिजन बोले-डॉक्टरों ने IGMC रैफर किया शव….स्वास्थ्य मंत्री के बयान से मचा बवाल

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अर्की स्थित सिविल अस्पताल में पथरी का ऑप्रेशन कराने आई एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने और मौत के बाद सच छिपाने के लिए शव को शिमला रैफर करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। वहीं, इस बेहद संवेदनशील मामले पर सूबे के स्वास्थ्य मंत्री की एक कथित टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे यह मुद्दा अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद में तब्दील हो गया है।

गाल ब्लैडर में थी पथरी की शिकायत 

जानकारी के अनुसार भुमति क्षेत्र की रहने वाली 40 वर्षीय सीमा शर्मा को गाल ब्लैडर (पित्ताशय) में पथरी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे सीमा को ऑप्रेशन थिएटर में ले जाया गया। शुरुआत में डॉक्टरों ने सब कुछ सामान्य बताया, लेकिन करीब 12:30 बजे अचानक अस्पताल में हलचल तेज हो गई। डॉक्टर और नर्सें घबराहट में लगातार ऑप्रेशन थिएटर के अंदर-बाहर आने-जाने लगे, जिससे बाहर बैठे परिवार वालों को किसी अनहोनी की आशंका होने लगी। दोपहर करीब 1:30 बजे डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि महिला की हालत बेहद नाजुक है और उसे तुरंत आईजीएमसी शिमला रैफर करना होगा।

पूरी तरह ठंडा पड़ चुका था शरीर, लगातार हो रही थी ब्लीडिंग

परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने मरीज को देखा, तो उसका शरीर पूरी तरह ठंडा पड़ चुका था, त्वचा नीली पड़ गई थी और लगातार खून बह रहा (ब्लीडिंग) था। परिवार ने जब डॉक्टरों से स्थिति की सच्चाई जाननी चाही, तो उन्हें कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। परिजनों का दावा है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें मरीज को ठीक से देखने तक नहीं दिया और भारी जल्दबाजी दिखाते हुए महिला को एंबुलेंस में डालकर शिमला के लिए रवाना कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि इतनी गंभीर हालत में रैफर किए जाने के बावजूद एंबुलेंस में महिला के साथ कोई डॉक्टर या नर्स नहीं भेजा गया। रास्ते भर परिजन एंबुलेंस कर्मियों से मरीज की हालत पूछते रहे, लेकिन उन्हें यही जवाब मिला कि वहां पहुंचकर डॉक्टर ही बताएंगे।

आईजीएमसी में डॉक्टरों की बात सुनते ही पैरों तले खिसक गई जमीन 

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब परिजन महिला को लेकर आईजीएमसी शिमला पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि शिमला में जांच करने के बाद डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि महिला की मौत कुछ घंटे पहले ही हो चुकी है। यह सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। अब स्थानीय लोग और परिजन भड़के हुए हैं। उनका सीधा सवाल है कि यदि महिला की मौत अर्की अस्पताल में ही हो चुकी थी, तो उसे शिमला रैफर करने का नाटक क्यों किया गया? क्या डॉक्टरों ने अपनी लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने के लिए एक मृत शरीर को दूसरे अस्पताल भेज दिया? इस घटना के बाद अर्की क्षेत्र में भारी रोष है और लोग निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

BMO अर्की ने किया विशेष जांच समिति का गठन

लगातार बढ़ते तनाव और आरोपों के बीच अर्की की खंड चिकित्साधिकारी डॉ. मुक्ता रस्तोगी ने अपना पक्ष रखा है। घटना की पुष्टि करते हुए उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच समिति का गठन कर दिया गया है। डॉ. रस्तोगी ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर निष्पक्ष रूप से आगामी और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री के बयान से गरमाई सियासत

एक तरफ परिवार महिला की मौत का मातम मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री के एक कथित बयान ने सियासी भूचाल ला दिया है। जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्री ने पहले तो कैमरे के सामने मामले की निष्पक्ष जांच करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में उनका एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वह कथित तौर पर कह रहे हैं कि “पानी पीते नहीं है तो मरना ही है।” सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होते ही विपक्ष और आम जनता ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोगों का कहना है कि इतने संवेदनशील और दुखद मामले में जहां एक परिवार ने लापरवाही के चलते अपना सदस्य खोया है, वहां राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी अमानवीय और बेतुकी टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जा सकती। फिलहाल, अर्की से लेकर शिमला तक इस मामले की गूंज है और सभी की निगाहें अब जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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Author: Desk

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