पहाड़ों की शांत सुबह कब चीख-पुकार और मातम में बदल जाए, कहा नहीं जा सकता। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर विधानसभा क्षेत्र में सोमवार की सुबह कुछ ऐसा ही हुआ। महज एक छोटी सी लापरवाही और एक कप चाय की कीमत एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
यह दर्दनाक हादसा निहरी पुलिस चौकी के तहत आने वाले चरखड़ी गांव में हुआ। सुबह का वक्त था, एक निजी बस सड़क किनारे खड़ी थी। बस का इंजन स्टार्ट था, मानो सफर शुरू होने ही वाला हो। ड्राइवर और कंडक्टर सफर शुरू करने से पहले एक-एक कप चाय पीने के लिए बस को स्टार्ट हालत में छोड़कर नीचे उतर गए।
बस के भीतर 5 यात्री अपनी-अपनी सीटों पर बैठे थे, इस बात से बेखबर कि अगले ही पल क्या होने वाला है। ड्राइवर के उतरते ही बस अचानक ढलान की ओर लुढ़क पड़ी। यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते बस सड़क से नीचे लुढ़कते हुए दूसरी सड़क पर जा गिरी।
बस के गिरते ही वहां कोहराम मच गया। जो यात्री अपनी मंजिल पर पहुंचने का इंतजार कर रहे थे, वे खून से लथपथ हालत में मदद की गुहार लगा रहे थे। धमाके की आवाज सुनकर स्थानीय ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने टूटी हुई खिड़कियों और दरवाजों से घायलों को बाहर निकाला।
108 एंबुलैंस की मदद से सभी को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन अफसोस इस हादसे ने एक परिवार से उनका साया छीन लिया। अस्पताल में इलाज के दौरान 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया। वहीं, दो अन्य यात्रियों की हालत इतनी नाजुक है कि उन्हें शिमला के IGMC अस्पताल रैफर किया गया है।
डीएसपी सुंदरनगर भारत भूषण ने बताया कि पुलिस हादसे के कारणाें की जांच कर रही है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर हैं। उधर, स्थानीय विधायक राकेश जम्वाल ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। हादसा हो चुका है, लेकिन अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया है। क्या सिर्फ एक चाय के लिए बस को स्टार्ट हालत में छोड़ना जरूरी था? यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? पुलिस जांच करेगी, लेकिन जिस परिवार ने अपने सदस्य को खोया है, उस घाव को भरने में शायद पूरी उम्र लग जाए।







