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Video: चुनाव प्रचार छोड़ मसीहा बना जिला परिषद प्रत्याशी, घने जंगल में उतरकर बचाई तड़पते सांड की जान, जीते लोगों के दिल

राजनीति में चुनाव जीतने के लिए नेता अक्सर बड़े-बड़े वायदे करते हैं, लेकिन झंडूत्ता क्षेत्र में एक युवा प्रत्याशी ने अपने काम से साबित कर दिया है कि उनके लिए चुनाव से बढ़कर किसी की जिंदगी है। जांगला (वार्ड नंबर 8) से जिला परिषद का चुनाव लड़ रहे युवा प्रत्याशी देवांश चंदेल ने अपना चुनाव प्रचार बीच में छोड़कर, घने जंगल में मौत से लड़ रहे एक घायल सांड को नया जीवन दिया है। उनके इस नि:स्वार्थ कदम की पूरे इलाके में जमकर तारीफ हो रही है और लोग कह रहे हैं कि इस युवा ने चुनाव जीतने से पहले ही जनता का दिल जीत लिया है।

यह पूरी घटना झंडूत्ता के समोह जंगल की है। जानकारी के अनुसार एक भारी-भरकम सांड पहले सड़क किनारे घायल अवस्था में था। कुछ लोगों ने उसकी मदद करने की कोशिश की, लेकिन सांड बिदक गया और डर के मारे घने जंगल में जा घुसा। इसके बाद कुछ लोगों ने देवांश चंदेल को इसकी सूचना दी, ताकि यह परखा जा सके कि वोट मांगने वाला यह युवा प्रत्याशी बेजुबानों की मदद के लिए असल में आगे आता है या नहीं। सूचना मिलते ही देवांश ने बिना एक पल गंवाए अपना चुनाव प्रचार रोक दिया। वे तुरंत अपने साथी कार्यकर्ताओं और एक पशु चिकित्सक को लेकर मौके पर पहुंच गए।

जंगल इतना घना था कि वहां न कोई रास्ता था और न ही पैर रखने की जगह। देवांश और उनकी टीम करीब 25 मीटर नीचे गहरी और कांटेदार झाड़ियों के बीच पहुंचे। वहां सांड की हालत बेहद दयनीय थी। आशंका है कि सांड का जबड़ा जंगल में लगी कांटेदार तार की चपेट में आ गया था, जिससे उसका मुंह बुरी तरह फट चुका था। घाव में कीड़े पड़ गए थे और वह कुछ भी खा-पी नहीं पा रहा था। भूख-प्यास से तड़पते हुए उसे मरने की नौबत आ गई थी। देवांश और उनकी टीम ने मौके पर ही डॉक्टर की मदद से सांड का ‘ऑप्रेशन जिंदगी बचाओ’ शुरू किया। सांड को प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर कड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित सड़क तक पहुंचाया गया।

विरासत में मिली है समाजसेवा

देवांश चंदेल जांगला के वार्ड नंबर 8 से जिला परिषद प्रत्याशी हैं और उन्हें ‘छाता’ चुनाव चिह्न मिला है। लोगों का कहना है कि जिस तरह छाता मुश्किल घड़ी में साथ देता है, देवांश भी उसी तरह मुसीबत में मसीहा बनकर पहुंचे हैं। देवांश के लिए समाजसेवा कोई नई बात नहीं है। यह कारवां उनके दादा जी से शुरू हुआ था, जो इलाके के मशहूर वैद्य थे। उनके बाद देवांश के पिता ने इस सेवा भाव की विरासत को संभाला और अब देवांश उसी नक्शेकदम पर चल रहे हैं। वे राजनीति में आकर फ्रंट फुट पर जनता और बेजुबानों की सेवा करना चाहते हैं।

सच्ची गौ-सेवा की पेश की मिसाल

आज के दौर में जहां राजनीतिक लाभ के लिए ‘गौ माता’ के नाम पर सिर्फ दावे किए जाते हैं, वहीं देवांश ने बिना किसी स्वार्थ और लालच के सच्ची गौ-सेवा की मिसाल पेश की है। युवा सोच, शिक्षित व्यक्तित्व, विनम्र स्वभाव (पोलाइट) और हर सुख-दुख में खड़े होने की उनकी इस खूबी ने उन्हें हर दिल अजीज बना दिया है। इस घटना के बाद देवांश पूरे जांगला वार्ड में छा गए हैं और उनके इस मानवीय कार्य ने मतदाताओं के सामने एक बेहतरीन विकल्प पेश कर दिया है।

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Author: Desk

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