राजनीति के अखाड़े में कब, क्या और कैसे हो जाए, इसकी भविष्यवाणी करना नामुमकिन है। चुनावी मौसम में अक्सर रिश्ते पीछे छूट जाते हैं और विचारधाराएं टकराती हैं। ऐसा ही एक बेहद दिलचस्प वाकया हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से सामने आया है। यहां के नादौन उपमंडल की टिल्लू पंचायत का चुनाव पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
टिल्लू पंचायत में प्रधान पद का चुनाव इस बार आम चुनाव नहीं था। यहां की बिसात पर एक ही परिवार के दो सदस्य (पिता और पुत्र) आमने-सामने थे। दिलचस्प बात यह रही कि यह लड़ाई सिर्फ घर की चारदीवारी या पीढ़ियों की नहीं थी, बल्कि यह सीधे तौर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच की हाई-वोल्टेज सियासी जंग में तब्दील हो गई थी। चुनावी मैदान में कांग्रेस समर्थित बेटा, तो वहीं भाजपा समर्थित पिता उतरा हुआ था।
जब मतपेटियां खुलीं तो जो नतीजे सामने आए, उसने सबको चौंका दिया। कांग्रेस समर्थित बेटे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा समर्थित अपने पिता को चारों खाने चित कर दिया। जीत का अंतर इतना विशाल था कि कोई इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता था। गांव वालों ने बेटे पर अपना भरपूर प्यार और भरोसा लुटाते हुए उसे 182 वोट दिए। वहीं, पिता को इस पूरे चुनाव में सिर्फ 5 वोट ही नसीब हो सके। ता-पुत्र के बीच 182 बनाम 5 वोटों का यह एकतरफा मुकाबला अब पूरे नादौन क्षेत्र में ‘हॉट टॉपिक’ बन गया है। चाय की टपरियों से लेकर गांव की चौपालों तक, हर जगह इसी अप्रत्याशित नतीजे की चर्चा है।
राजनीति के जानकारों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इस चौंकाने वाले नतीजे के पीछे सबसे बड़ा हाथ युवाओं का है। इस बार चुनाव में युवा वोटर्स ने खामोशी से अपना खेल कर दिया। गांव वालों ने पुरानी और पारंपरिक राजनीति को दरकिनार करते हुए एक स्पष्ट संदेश दिया है। लोगों ने विकास और बदलाव को अपना मुख्य मुद्दा बनाया और गांव की कमान एक युवा चेहरे के हाथों में सौंपने के लिए एकतरफा वोटिंग की।







