समाज में घर को सबसे सुरक्षित जगह और भाई को बहन का रक्षक माना जाता है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक ऐसा खौफनाक सच सामने आया है, जिसने इन दोनों मान्यताओं को जमींदोज कर दिया है। यहां एक 14 साल के नाबालिग लड़के पर अपनी ही 15 वर्षीय सगी बहन के साथ महीनों तक शारीरिक शोषण करने का संगीन आरोप लगा है।
इस खौफनाक राज पर से पर्दा तब उठा, जब परिवार इसे एक आम स्वास्थ्य समस्या मान रहा था। पीड़िता की मां के अनुसार, 15 वर्षीय किशोरी को पिछले कुछ महीनों से पीरियड्स नहीं आ रहे थे। शुरुआत में परिजनों ने इसे मौसम या कमजोरी का असर समझ, लेकिन जब किशोरी की तबीयत लगातार गिरने लगी, तो उसे मंडी के नेरचौक मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
अस्पताल के जांच कक्ष में डॉक्टरों ने जब उसकी रिपोर्ट देखी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि किशोरी गर्भवती है। यह खबर परिवार के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं थी। जब परिजनों ने अपनी बेटी से सच जानना चाहा, तो उसने आंसुओं के बीच जो कहानी सुनाई, उसने खून के रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया।
किशोरी ने बताया कि उसका 14 वर्षीय सगा भाई ही महीनों से उसकी अस्मत लूट रहा था। आरोपी भाई उसे इस कदर डरा-धमका कर रखता था कि वह अपने साथ हो रही दरिंदगी के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल पाई। एक ही छत के नीचे रहते हुए वह हर दिन अपनी इच्छा के विरुद्ध इस जुल्म को सहने को मजबूर थी और डर के कारण किसी से मदद नहीं मांग सकी। सच सामने आने के बाद, एक मां के लिए यह तय करना बेहद मुश्किल था कि वह अपनी बेटी के न्याय के लिए लड़े या बेटे को बचाए, लेकिन मां ने न्याय का साथ चुना और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पीड़िता के बयान, मां की शिकायत और नेरचौक मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी किशोर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो (एक्ट की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। यह मामला कानूनी रूप से भी बेहद जटिल है क्योंकि इसमें पीड़िता और आरोपी, दोनों ही नाबालिग हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत इस पूरे मामले की जांच बेहद संवेदनशीलता और पूरी गोपनीयता के साथ की जा रही है।
फिलहाल, पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्य जुटा रही है और मामले की हर बारीकी की पड़ताल कर रही है। इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है और समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों की काउंसलिंग और घर के भीतर उनके व्यवहार पर नजर रखना आज के समय में कितना जरूरी हो गया है।








