शाहतलाई (कमल): हिमाचल ने खोया एक और फौजी जवान… आतंकियों से लोहा लेते जम्मू कश्मीर में हुआ शहीद… अभी नौजवान था… 35 साल का था… 9 साल पहले शादी हुई थी… लेकिन हमार-आपकी और देश की रक्षा करते करते आज देश पर कुर्बान हो गया। कल रात तक सब ठीक था लेकिन सुबह होते ही परिवार के पास एक फोन आता है। जिसमें बेटे की बुरी खबर मिलती है।
शहीद का नाम बलदेव चंद है, जो बिलासपुर के झंडूत्ता के रहने वाले थे। सनीहरा पंचायत के छोटे से गांव थेह से उठकर भारतीय सेना में जाकर बॉर्डर पर देश की रक्षा कर रहे थे और देश की रक्षा करते करते मां भारती पर कुर्बान हो गई। बलदेव फौजियों के परिवार से हैं, उनके पिता विशन दास भी फौज से रियाटर हैं।
बताया जा रहा है कि बलदेव किश्तवाड़ में तैनात थे। जहां कल से भारतीय सेना और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ चली हुई है। 35 साल के बलदेव चंद 58 आर्मड RR में तैनात थे। किश्तवाड़ में भारतीय सेना ने कुछ आतंकियों को घेरा हुआ है। इसी बीच दोनों तरफ से फायरिंग हो रही थी और इसी फायरिंग में बलदेव चंद को गोली लग गई। घायल हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टर्स ने उन्हें शहीद घोषित कर दिया।
कल जब परिवार से उनकी बात हुई थी, तो सब ठीक ठाक था। फायरिंग हो रही थी, इसलिए परिवार चिंता में था, लेकिन बताया जा रहा है कि सुबह होते ही सेना की तरफ से सूबेदार राजकुमार ने शहीद के पिता विशन दास से बात की और उनकी शहादत की जानकारी दी।
फिलहाल शहीद की पार्थिव देह अभी घर नहीं पहुंची है। आज शाम या कल तक उनकी देह घर पहुंचेगी। बुरी खबर मिलने के बाद परिवार का बुरा हाल हैं। पत्नी और मां बेहाल हैं… वो अपने फौजी के अंतिम दर्शनों के लिए तरस रहे हैं।
बताया जा रहा है कि 9 साल पहले बलदेव की शादी हुई थी लेकिन अफसोस की जन्मों जन्मों का ये साथ नौ साल में ही छूट गया। सारे कसमें वादे… टूट गई… और जन्मों जन्मों का साथी छोड़कर चला गया।
बलदेव की शहादत से पूरा इलाका गमगीन है। गांव वाला का कहना है कि बलदेव बड़ा ही होनहार मिलनसार था। पढ़ने में होशियार और खेल कूद में अव्वल था। वे वॉलीबॉल का अच्छे खिलाड़ी थे।
बलदेव चंद ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई भेड़ी स्कूल से की है और उसके बाद वो सेना में चले गए थे और देश सेवा कर रहे थे। खैर भगवान शहीद की आत्मा को शांति दे और दुखी परिवार को दुख सहने की शक्ति।
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