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पंचायत चुनाव: 40 साल, 8 चुनाव और हार ‘जीरो’… मिलिए हिमाचल की राजनीति के इस 76 वर्षीय ‘अजेय सिकंदर’ से

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के पहले चरण के नतीजों ने राजनीति की कई अनोखी और प्रेरणादायक कहानियां गढ़ी हैं। कहीं सियासत परिवारों में सिमटी दिखी, तो कहीं दशकों पुराने जनविश्वास ने मतपेटियों में अपना जलवा बिखेरा। इसी बीच ऊना जिले से एक ऐसी दिलचस्प खबर आई है, जो साबित करती है कि राजनीति में पब्लिक सब जानती है और जो उनके सुख-दुख का साथी है, वही असली सिकंदर है।

मिलिए ऊना जिले की धुसाड़ा पंचायत के 76 वर्षीय सतीश शर्मा से। उम्र के इस पड़ाव पर जहां लोग आराम की तलाश करते हैं, वहां सतीश शर्मा ने चुनाव प्रचार के दौरान किसी युवा नेता जैसी ऊर्जा दिखाई और मंगलवार को नतीजे आते ही इतिहास रच दिया। उन्होंने धुसाड़ा पंचायत के प्रधान पद पर शानदार जीत हासिल की है। यह उनकी लोकप्रियता का ही कमाल है कि अपने करीब 40 साल के लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने आज तक हार का स्वाद नहीं चखा है।

सतीश शर्मा का राजनीतिक बायोडाटा किसी भी दिग्गज नेता को हैरत में डाल सकता है। वह अब तक कुल 8 बार चुनावी मैदान में उतरे और आठों बार जनता ने उनकी झोली में जीत डाली है। उनके चुनावी सफर पर एक नज़र डालें तो इस जीत को मिलाकर वह 2 बार धुसाड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान चुने जा चुके हैं।
उन्होंने 5 बार पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ा और हर बार बंपर वोटों से जीते। वे लंबे समय तक अम्ब ब्लॉक समिति के चेयरमैन भी रहे। पिछले चुनावों में उन्होंने चिंतपूर्णी क्षेत्र के ठठल वार्ड से जिला परिषद सदस्य का चुनाव भी जीता था।

इतने लंबे समय तक सत्ता के शीर्ष पर रहने के बावजूद सतीश शर्मा बेहद शालीन हैं। अपनी इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय वे खुद को नहीं, बल्कि जनता को देते हैं। उनका कहना है कि यह मेरी कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि इलाके के लोगों का मेरे प्रति अगाध स्नेह और विश्वास है। सच कहूं तो मैं खुद अब चुनावी समर से बाहर होना चाहता हूं, लेकिन हर बार चुनाव आते ही ग्रामीण एकजुट होकर मेरे पास चले आते हैं और चुनाव लड़ने का आग्रह करते हैं। जनता के इसी प्यार का कर्ज चुकाने के लिए मैं आखिरी सांस तक पंचायती राज प्रणाली के जरिए लोगों की सेवा में जुटा रहूंगा।

आज के दौर में जहां राजनीति के मायने बदल गए हैं, सतीश शर्मा की यह कहानी एक बड़ा संदेश देती है। यह बताती है कि ग्रामीण स्तर पर आज भी नेता का व्यक्तिगत व्यवहार, सामाजिक सक्रियता और लोगों के सुख-दुख में उनकी मौजूदगी ही सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। सतीश शर्मा लगातार जनता के बीच बने रहते हैं, यही वजह है कि पीढ़ियां बदल जाने के बाद भी धुसाड़ा की जनता अपना प्रतिनिधित्व सौंपने के लिए हर बार उन्हीं पर भरोसा जताती है।

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Author: Desk

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