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हमीरपुर: एक साथ उठी सास-बहू की अर्थी, बहू ने सास के मुंह में डाला पंचामृत, फिर लिपटकर कहे 7 शब्द और छोड़ दी दुनिया… देखें दोनों के प्यार का Video…

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के भोरंज उपमंडल के जाहू गांव में एक ऐसी हृदय विदारक घटना घटी, जिसने भी सुना उसकी आंखें नम हो गईं। यहां सास और बहू के बीच के पवित्र और अटूट प्रेम की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जो मृत्यु के बाद भी कायम रही। 85 वर्षीय सास की मृत्यु का सदमा बहू इस कदर बर्दाश्त नहीं कर पाई कि ठीक एक घंटे बाद उसने भी अपने प्राण त्याग दिए।

दामोदरी देवी (85) और उनकी बहू रेशमा देवी के बीच मां-बेटी जैसे रिश्ता था। बुधवार शाम करीब सात बजे दामोदरी देवी ने अपनी अंतिम सांस ली। परिवार में मातम पसर गया। अपनी सास को मां मानने वाली बहू रेशमा ने अपने दुख को एक तरफ रखकर एक आदर्श बहू का फर्ज निभाना शुरू किया।

रेशमा ने खुद अपनी सास के अंतिम संस्कार की सारी सामग्री जुटाई। उसने सास के मुख में पंचामृत डाला और अंतिम यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कीं। करीब एक घंटे तक वह पत्थर की तरह सब्र किए रहीं, लेकिन जब हिम्मत का बांध टूटा तो वह अपनी सास के पार्थिव शरीर से लिपट गईं। रूंधे गले से उनके मुंह से सिर्फ सात शब्द निकले, “ओ मेरी मां, ये क्या हो गया…”

बस यही उसके आखिरी शब्द थे। इतना कहते ही वह सास के ऊपर ही अचेत होकर गिर पड़ी। परिवार वालों ने सोचा कि शायद वह गहरे सदमे से बेहोश हो गई है। जब काफी देर तक उसे होश नहीं आया तो तुरंत भोरंज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि अस्पताल लाने से लगभग पौना घंटा पहले ही रेशमा देवी मृत्यु हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि रेशमा देवी हृदय रोग से पीड़ित थी और अपनी सास के जाने का गहरा सदमा सहन नहीं कर सकी, जिससे उसे दिल का दौरा पड़ा और उसकी माैत हाे गई।

इस दोहरे दुख ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। रेशमा देवी के पति कश्मीर सिंह पिछले एक साल से अधरंग से पीड़ित हैं। एक साथ अपनी मां और पत्नी को खो देने के सदमे से वह सुध-बुध खो बैठे हैं। रेशमा के दो बच्चे ( एक बेटा बंटी और एक बेटी मोनू) हैं, दोनों ही शादीशुदा हैं। बेटा दिल्ली में नौकरी करता है। उसे जब दादी के निधन की खबर मिली तो वह दिल्ली से घर के लिए रवाना हो गया, लेकिन उसे क्या पता था कि घर पहुंचने पर उसे अपनी मां के निधन का वज्रपात भी झेलना पड़ेगा।

गुरुवार को जब एक ही आंगन से सास-बहू की अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरा गांव रो पड़ा। श्मशानघाट पर जब दोनों की चिताएं एक साथ जलीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें आंसुओं से भरी थीं। गांव वालों का कहना है कि रेशमा और दामोदरी का रिश्ता सास-बहू का नहीं, बल्कि मां-बेटी का था। रेशमा खुद बीमार रहने के बावजूद हमेशा अपनी बुजुर्ग सास और बीमार पति की सेवा में लगी रहती थीं। इस घटना ने न केवल परिवार को, बल्कि पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है।

नीचे देखें सास-बहू के प्यार का पूरा वीडियो…

Desk
Author: Desk

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