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हिमाचल का लाल देश पर कुर्बान: नायक सुशील कुमार पंचतत्व में विलीन, बेटे ने दी मुखाग्नि तो भर आईं सबकी आंखें

ड्यूटी के दौरान बलिदान हुए हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के पनियाला गांव के वीर सपूत और भारत मां के रक्षक नायक सुशील कुमार का आज उनके पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। नायक सुशील कुमार का पार्थिव शरीर बुधवार को विमान के जरिए लखनऊ से चंडीगढ़ लाया गया। वहां से एंबुलैंस के माध्यम से दोपहर करीब 12 बजे उनके पैतृक गांव पनियाला पहुंचाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।

बता दें कि 13 डोगरा रैजिमेंट के नायक सुशील कुमार (40) उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में अपनी बटालियन के साथ तैनात थे। जानकारी के अनुसार 20 अक्तूबर की सुबह करीब 4 बजे ड्यूटी के दौरान अचानक उन्हें चक्कर आया और उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए कमांडो अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दिवाली की शाम करीब 7 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

बुधवार को जब इस वीर जवान का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पहुंचा तो ताे माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। परिवार की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद हर किसी का कलेजा कांप उठा। हर आंख नम थी और हर दिल में गर्व और पीड़ा का मिला-जुला भाव था। ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद सुशील कुमार अमर रहे’ के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। पूरे सैन्य सम्मान के साथ वीर सपूत काे अंतिम विदाई दी गई। सेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

 

वह क्षण सबसे हृदय विदारक था जब उनके मासूम बेटे नक्ष राणा ने कांपते हाथों और नम आंखों से अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद विधायक, प्रशासनिक अधिकारियों और आम लोगों की आंखें भी छलक पड़ीं। इस दुख की घड़ी में सुजानपुर के विधायक कैप्टन रंजीत कुमार, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पहुंचकर शहीद को श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। विधायक ने कहा कि नायक सुशील कुमार का जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे हिमाचल और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी शहादत को यह देश हमेशा याद रखेगा।

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Author: Desk

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