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हिमाचल: अब सिरमाैर के इन 2 भाइयों की अनोखी शादी ने किया सबको हैरान, न सात फेरे लिए और न सात वचन

जहां शादियों में मंत्रोच्चार और अग्नि के फेरों की गूंज आम होती है, वहीं सिरमौर के एक छोटे से गांव कलोग में एक ऐसी शादी हुई, जिसकी गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। यहां दो सगे भाइयों ने धार्मिक कर्मकांडों से परे, भारत के संविधान को साक्षी मानकर अपनी जीवन संगिनियों का हाथ थामा और प्यार तथा सम्मान की एक नई इबारत लिख दी।

कलोग गांव के सुनील कुमार और विनोद कुमार दोनों सरकारी नौकरी में हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का जज्बा रखते हैं। जब उनकी शादी की बात आई, तो उन्होंने तय किया कि वे इस रिश्ते को किसी परंपरा या रूढ़ि की बेड़ियों में नहीं, बल्कि समानता और आपसी समझ की नींव पर खड़ा करेंगे।

26 अक्तूबर को हुए इस विवाह समारोह का नजारा बिल्कुल अलग था। यहां न तो कोई पंडित था, न हवन कुंड जल रहा था और न सात फेरों की रस्म हुई और न ही 7 वचन लिए गए। वरमाला के बाद सुनील ने रितु और विनोद ने रीना वर्मा के साथ बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए भारतीय संविधान को साक्षी माना। उन्होंने संविधान की शपथ लेकर एक-दूसरे का जीवन भर साथ निभाने, सम्मान करने और हर सुख-दुख में भागीदार बनने का वादा किया।

दोनों भाइयों का मानना है कि विवाह दो दिलों और दो परिवारों का मेल है। इसके लिए किसी दिखावे या कर्मकांड की नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और सम्मान की जरूरत होती है। इस अनोखी शादी में पारंपरिक बारात भी निकली और स्थानीय रीति-रिवाजों का भी मान रखा गया, लेकिन शादी की मुख्य रस्म मानवता और संविधान के मूल्यों को समर्पित रही।

इस विवाह की सोच सिर्फ रस्मों तक ही सीमित नहीं थी। शादी के कार्ड पर भी एक तरफ शांति और करुणा के प्रतीक महात्मा बुद्ध की तस्वीर थी, तो दूसरी तरफ समानता के प्रतीक डॉ. भीमराव अंबेडकर की। यह इस बात का संदेश था कि यह परिवार धार्मिक रूढ़ियों से ऊपर उठकर मानवता और तार्किकता के रास्ते पर चल पड़ा है।

इस अनोखी पहल के लिए दोनों के परिवारों का पूरा समर्थन मिला और गांव वालों ने भी बड़ी संख्या में शामिल होकर नव दंपतियों को अपना आशीर्वाद दिया। लोगों का कहना है कि यह शादी सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो युवाओं को सामाजिक सुधार की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करेगा।

दिलचस्प है कि सिरमौर का यही गिरिपार क्षेत्र कुछ महीने पहले भी एक अनोखी शादी का गवाह बना था, जहां हाटी समुदाय की बहुपति प्रथा के अनुसार एक दुल्हन ने दो भाइयों से विवाह किया था। एक तरफ जहां एक परंपरा निभाई गई, वहीं दूसरी तरफ कलोग गांव के इन दो भाइयों ने परंपराओं से आगे बढ़कर एक नई मिसाल पेश की है।

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Author: Desk

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