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हिमाचल के ‘फार्मा हब’ से डराने वाली खबर, 47 दवाओं के सैंपल फेल, बाजार से स्टाॅक वापस मंगवाने के आदेश

जब कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है तो उसकी और उसके परिवार की सारी उम्मीदें दवा पर टिकी होती हैं। वह भरोसा करता है कि यह गोली उसे ठीक कर देगी। लेकिन अगर वही दवा मानकों पर खरी न उतरे तो यह सीधे तौर पर इंसान के विश्वास और जीवन के साथ खिलवाड़ है। हिमाचल प्रदेश, जिसे देश का ‘फार्मा हब’ कहा जाता है, वहां से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ताजा जांच में हिमाचल में बनी दवाओं के 47 सैंपल फेल हो गए हैं। इसके चलते सीडीएससीओ ने इस माह का ड्रग अलर्ट जारी किया है। देशभर में कुल 200 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा (47 सैंपल) अकेले हिमाचल प्रदेश का है। यह आंकड़ा इसलिए भी डराने वाला है क्योंकि ये दवाएं देशभर के मरीजों तक पहुंचती हैं।

इस जांच में सोलन और सिरमौर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की दवाएं सवालों के घेरे में हैं। सोलन जिला में दवाओं के सबसे अधिक 28 सैंपल फेल हुए हैं। इसमें भी बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) क्षेत्र जहां देश की सबसे ज्यादा दवाएं बनती हैं, वहां की करीब 23 दवाएं मानकों को पूरा नहीं कर पाईं। सिरमौर जिला के कालाअम्ब और पांवटा साहिब के दवा उद्योगों की 18 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। कालाअम्ब स्थित एक ही उद्योग के 5 सैंपल फेल होना बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है। इसके अलावा जिला ऊना यहां से भी एक दवा का सैंपल जांच में फेल हुआ है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग विभाग तुरंत हरकत में आ गया है। राज्य ड्रग नियंत्रक (बद्दी) मनीष कपूर ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए तुरंत प्रभाव से सभी संबंधित दवा उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। बाजार में मौजूद इन खराब दवाओं के पूरे स्टॉक को रिकॉल (वापस मंगवाने) के सख्त आदेश दिए गए हैं, ताकि किसी मरीज तक यह दवा न पहुंचे। ड्रग निरीक्षकों को इन फैक्ट्रियों का मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पता लगाया जा सके कि उत्पादन में चूक कहां हो रही है।

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Author: Desk

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